बुधवार, 5 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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अदालती कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा स्पष्टीकरण, जानें क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक हालिया अंतरिम आदेश को लेकर बने भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि इसका मकसद मान्यता प्राप्त समाचार संगठनों द्वारा अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना…

अदालती कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा स्पष्टीकरण, जानें क्या कहा
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक हालिया अंतरिम आदेश को लेकर बने भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि इसका मकसद मान्यता प्राप्त समाचार संगठनों द्वारा अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना नहीं है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अदालत ने यह भी दोहराया कि मीडिया अपनी कवरेज में न्यायिक कार्यवाही के ऑडियो या वीडियो क्लिप का इस्तेमाल नहीं कर सकता है।

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यह स्पष्टीकरण भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिया। पीठ ने पाया कि 24 जुलाई को जारी किए गए अंतरिम आदेश के पैराग्राफ 11 को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। यह आदेश देशभर की अदालतों में कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए एक समान व्यवस्था बनाने की याचिका पर दिया गया था।

क्या था 24 जुलाई का आदेश?

24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि शीर्ष अदालत के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बिना न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को किसी भी डिजिटल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित, संग्रहित, अपलोड, री-पोस्ट या उससे कमाई नहीं की जा सकती। यह अंतरिम निर्देश एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया था, जिसमें सभी उच्च न्यायालयों और प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों को पक्षकार बनाया गया था।

अदालत ने अब क्या साफ किया?

अपने नए आदेश में, CJI की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, "उक्त पैराग्राफ से यह स्पष्ट होता है कि इस आदेश का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि मान्यता प्राप्त समाचार माध्यमों द्वारा अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है।" पीठ ने कहा कि समाचार संगठन आम जनता को अदालती फैसलों और कानूनी घटनाक्रमों की जानकारी देने के लिए अपनी रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें ऑडियो या वीडियो क्लिप के इस्तेमाल से बचना होगा।

मामले में आगे की कार्यवाही

अदालत ने प्रतिवादियों को अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की गई है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव तैयार करने और सभी उच्च न्यायालयों को लाइव-स्ट्रीमिंग के लिए 'मॉडल नियमों' को अपनाने पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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