दिल्ली प्रदर्शन में बच्ची घायल होने का मामला: NHRC ने जांच के दिए आदेश, गलत सूचना पर भी कार्रवाई के निर्देश
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली में हुए 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान एक 12 वर्षीय बच्ची के घायल होने के आरोपों का संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में न केवल बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चि…
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली में हुए 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान एक 12 वर्षीय बच्ची के घायल होने के आरोपों का संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में न केवल बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ी गलत सूचना फैलाने की भी जांच करने को कहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब मांगा गया है।
यह पूरा मामला एक शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन में बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाला गया। शिकायत में दावा किया गया कि एक 12 साल की बच्ची के सिर में चोट लगी। इसी शिकायत में पत्रकार सौरव दास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की गई जानकारी के गलत या भ्रामक होने की आशंका भी जताई गई।
जांच के प्रमुख निर्देश
सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली NHRC की पीठ ने 'मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993' की धारा 12 के तहत यह कार्रवाई शुरू की है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को कई स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
- बच्ची की सुरक्षा: सबसे पहले बच्ची को तुरंत बचाया जाए, उसे जरूरी चिकित्सा सुविधा दी जाए और कानून के अनुसार बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
- जिम्मेदार की पहचान: उस व्यक्ति की पहचान की जाए जो बच्ची को प्रदर्शन में लेकर आया था और उसके खिलाफ 'किशोर न्याय अधिनियम' के तहत उचित कार्रवाई हो।
- अधिकारी की भूमिका: यदि किसी अधिकारी द्वारा बच्चे के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की जाए।
- गलत सूचना पर एक्शन: यदि जांच में पाया जाता है कि सौरव दास द्वारा 'एक्स' पर फैलाई गई जानकारी गलत थी, तो उनके और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई हो।
सभी संबंधित विभागों — दिल्ली सरकार के समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर — को दो सप्ताह के भीतर 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' (ATR) सौंपने को कहा गया है।
दिल्ली पुलिस का खंडन
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर इस मामले में अपना पक्ष रखा है। 'एक्स' पर एक फैक्ट-चेक पोस्ट में पुलिस ने इन दावों को गलत बताया है। पुलिस ने कहा, "यह जानकारी गलत है। पोस्ट में किए जा रहे दावे सच नहीं हैं। कृपया गलत या गुमराह करने वाली जानकारी न फैलाएं और न ही उसे आगे बढ़ाएं।" पुलिस ने उन सभी दावों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि प्रदर्शन में एक 12 साल की बच्ची और 40-50 अन्य लोगों के सिर में चोटें आई हैं।
नाबालिगों का इस्तेमाल गंभीर अपराध: कानूनगो
IANS से बात करते हुए NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि सौरव दास द्वारा किए गए दावे गंभीर प्रकृति के हैं, जिसके चलते आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि अगर बच्ची घायल है तो उसका इलाज प्राथमिकता है, लेकिन अगर यह खबर झूठी है तो गलत जानकारी फैलाकर अशांति पैदा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, "विरोध प्रदर्शन में नाबालिग का इस्तेमाल जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 और 83 का उल्लंघन है। ऐसा करने वाले व्यक्ति को गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है और जेल भी जाना पड़ सकता है।"
इनपुट: IANS



