जगन्नाथ मंदिर की ज़मीनों के लिए ओडिशा में नए नियम लागू, पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन और पारदर्शी
ओडिशा में श्री जगन्नाथ मंदिर की हज़ारों एकड़ ज़मीन के प्रबंधन और निपटान के लिए राज्य सरकार ने नई नियमावली को मंज़ूरी दे दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 'श्री…
ओडिशा में श्री जगन्नाथ मंदिर की हज़ारों एकड़ ज़मीन के प्रबंधन और निपटान के लिए राज्य सरकार ने नई नियमावली को मंज़ूरी दे दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 'श्री जगन्नाथ मंदिर भूमि प्रबंधन नियम, 2026' को पारित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और कुशलता लाना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ये नए नियम पुराने 'समान नीति, 2003' और 'संशोधित समान नीति, 2019' की जगह लेंगे।
इन नियमों को श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 की संबंधित धाराओं के तहत बनाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियम ओडिशा राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी होंगे और दो साल की अवधि के लिए लागू रहेंगे।
क्या हैं नए नियमों की मुख्य बातें?
पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था: नए नियमों के तहत ज़मीन के निपटान से जुड़े आवेदनों की प्राप्ति, सत्यापन और निपटारे के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल-आधारित प्रणाली स्थापित की जाएगी। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनेगी।
ज़मीनों का डिजिटल रिकॉर्ड: सभी मंदिर भूमियों का व्यापक जीआईएस-आधारित डिजिटल मानचित्रण और सूची तैयार करना अनिवार्य किया गया है। यह एक सार्वजनिक डिजिटल डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगा, जिसे राजस्व विभाग के भूलेख/भुनक्षा पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा ताकि जानकारी हमेशा अपडेट रहे।
निगरानी और मूल्यांकन की प्रक्रिया
समितियों का गठन: ज़िला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक 'ज़िला स्तरीय भूमि उप-समिति' (DLSC) और हर आवेदन की ज़मीनी जाँच के लिए एक 'श्री जगन्नाथ महाप्रभु भूमि संचालन समिति' (SJMBSSC) बनाई जाएगी।
मूल्यांकन का नया आधार: ज़मीनों का मूल्यांकन बेंचमार्क मूल्य (BMV) और औसत भूमि बिक्री सांख्यिकी (ALSS) में से जो भी अधिक होगा, उसके आधार पर किया जाएगा। 0.250 डेसीमल तक की व्यावसायिक भूमि का मूल्यांकन इस दर के चार गुना पर होगा। वहीं, 30 साल से अधिक समय से कब्ज़े वाले मठों के लिए विशेष रियायतें भी दी गई हैं।
धोखाधड़ी पर सख़्त कार्रवाई: अगर कोई भी समझौता धोखाधड़ी, ग़लतबयानी या फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के ज़रिए किया गया पाया जाता है, तो श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) उसे रद्द कर सकती है। साथ ही, दोषी व्यक्तियों के ख़िलाफ़ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। इसके अलावा, पीड़ित पक्षों की सुनवाई के लिए विधि विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय अपील समिति भी गठित की गई है।
इनपुट: IANS



