नेपाल: भारतीय सेना की अग्निवीर योजना में भर्ती की मांग, पोखरा में युवाओं और पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन
नेपाल में युवाओं ने भारतीय सेना की अग्निवीर योजना के तहत भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पश्चिमी नेपाल के प्रमुख पर्यटन शहर पोखरा में बुधवार को…
नेपाल में युवाओं ने भारतीय सेना की अग्निवीर योजना के तहत भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पश्चिमी नेपाल के प्रमुख पर्यटन शहर पोखरा में बुधवार को युवाओं और भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के परिवारों ने एक रैली निकालकर सरकार से अपना फैसला बदलने की अपील की।
यह प्रदर्शन 'इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल' के बैनर तले आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने पोखरा स्टेडियम से जिला प्रशासन कार्यालय तक मार्च निकाला और वहां कास्की जिले के मुख्य जिला अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। उनके हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर अग्निवीर योजना के तहत भर्ती शुरू करने की मांग की गई थी।
क्यों रुकी है गोरखा भर्ती?
भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती प्रक्रिया साल 2019 से ही रुकी हुई है। शुरुआत में कोविड-19 महामारी के कारण इसमें देरी हुई, लेकिन 2022 में भारत सरकार द्वारा अग्निवीर योजना लागू किए जाने के बाद नेपाल सरकार ने भर्ती पर रोक लगा दी।
नेपाल सरकार का तर्क है कि यह नई योजना 1947 में भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों का पालन नहीं करती। इसी समझौते के तहत नेपाली युवाओं की भारतीय और ब्रिटिश सेनाओं में भर्ती होती आई है। अग्निवीर योजना के तहत चार साल की सेवा के बाद केवल 25 प्रतिशत सैनिकों को ही स्थायी नियुक्ति मिलती है, जबकि 75 प्रतिशत को पेंशन या अन्य दीर्घकालिक लाभों के बिना एकमुश्त राशि देकर सेवामुक्त कर दिया जाता है।
युवाओं और पूर्व सैनिकों की प्रमुख मांगें
रैली में शामिल पूर्व सैनिकों, उनके परिवार वालों और विदेशी सेनाओं में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने कहा कि नेपाली युवाओं को खाड़ी देशों में नौकरी खोजने के लिए मजबूर करने के बजाय उन्हें भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए। सोशल मीडिया पर जारी अपनी मांगों में उन्होंने कहा कि गोरखा सैनिकों की पहचान और परंपरा को बनाए रखने के लिए भर्ती प्रक्रिया तुरंत बहाल की जाए।
इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पूर्व सैनिकों के उन संगठनों के पंजीकरण पर रोक न लगाई जाए जिनके नाम में 'एक्स-सर्विसमेन' शब्द शामिल है। उनका मानना है कि ये संगठन पूर्व सैनिकों की गरिमा, अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं।
इनपुट: IANS



