स्टेम सेल से हृदय वाल्व बनाने में ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों को सफलता, बच्चों के इलाज में क्रांति की उम्मीद
ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एक शोध दल ने प्रयोगशाला में पहली बार स्टेम सेल का उपयोग करके मानव…
ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एक शोध दल ने प्रयोगशाला में पहली बार स्टेम सेल का उपयोग करके मानव हृदय वाल्व जैसा ऊतक (टिशू) सफलतापूर्वक विकसित किया है। यह खोज भविष्य में हृदय वाल्व से जुड़ी बीमारियों के इलाज, खासकर बच्चों के लिए, की दिशा बदल सकती है।
यह शोध-कार्य मेलबर्न स्थित मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (MCRI) के नेतृत्व में किया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि लैब में तैयार किया गया यह ऊतक न केवल मानव हृदय वाल्व की तरह दिखता है, बल्कि शरीर के अंदर मौजूद प्राकृतिक वाल्व की तरह ही बढ़ता और व्यवहार भी करता है। इस अहम अध्ययन के निष्कर्षों को प्रतिष्ठित 'सेल स्टेम सेल' नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
बीमारियों को समझने में मिलेगी मदद
इस नई तकनीक का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में आसानी होगी कि जन्म से लेकर वयस्क होने तक हृदय के वाल्व कैसे विकसित होते हैं। साथ ही, यह भी पता लगाया जा सकेगा कि किसी बीमारी या संक्रमण के कारण उनमें किस तरह के बदलाव आते हैं।
इसी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए शोधकर्ताओं ने इस मॉडल का उपयोग रूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) का अध्ययन करने के लिए किया। जब ऊतक को RHD से जुड़े सूजन पैदा करने वाले प्रोटीन के संपर्क में लाया गया, तो वह कठोर हो गया और उसमें वही जैविक संकेत दिखाई दिए जो रोगग्रस्त मानव हृदय वाल्व में पाए जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में यह बीमारी वहां की स्वदेशी आबादी को असमान रूप से प्रभावित करती है, और यह मॉडल इसके बेहतर उपचार खोजने में मददगार साबित हो सकता है।
लाखों मरीज़ों के लिए नई आशा
दुनिया भर में लगभग 2.8 करोड़ लोग हृदय वाल्व की बीमारियों से पीड़ित हैं, जिसके मुख्य कारण जन्मजात समस्याएं, संक्रमण या उम्र के साथ वाल्व का कमजोर होना हैं। MCRI में हार्ट रीजेनरेशन ग्रुप की टीम लीडर हॉली वोगेस के अनुसार, यह सफलता शरीर की अपनी कोशिकाओं का उपयोग करके क्षतिग्रस्त वाल्व की मरम्मत के लिए उपचार विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
MCRI के प्रोफेसर एंजो पोरेल्लो ने कहा कि इस तकनीक से भविष्य में ऐसे वाल्व बनाए जा सकते हैं जो मरीज़ के शरीर के साथ-साथ बढ़ें। यह बच्चों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि मौजूदा वाल्व प्रत्यारोपण में बच्चे के बड़े होने पर कई बार सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है। स्टेम सेल से बने वाल्व इस समस्या का स्थायी समाधान प्रदान कर सकते हैं।
इनपुट: IANS



