नेपाल: मधेश में सांप्रदायिक तनाव के बाद एक्शन में प्रधानमंत्री, विपक्षी नेताओं संग की बैठक
नेपाल के दक्षिणी मधेश प्रांत में फैली सांप्रदायिक हिंसा और तीन मौतों के बाद प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तनाव कम करने के लिए राजनीतिक संवाद शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक…
नेपाल के दक्षिणी मधेश प्रांत में फैली सांप्रदायिक हिंसा और तीन मौतों के बाद प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने तनाव कम करने के लिए राजनीतिक संवाद शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने संकटग्रस्त क्षेत्र के राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों से मुलाकात कर शांति बहाली के लिए सुझाव मांगे। यह कदम उनकी उस आलोचना के बाद उठाया गया है, जिसमें उन पर संकट के समय विपक्षी दलों से दूरी बनाने का आरोप लग रहा था।
आम तौर पर नेपाल में बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से सलाह-मशविरा करते हैं, लेकिन कहा जा रहा था कि बालेंद्र शाह लंबे समय से इस परंपरा से बचते रहे हैं। हालांकि, भारत की सीमा से लगे मधेश प्रांत में बिगड़ते हालात ने आखिरकार उन्हें अपनी चुप्पी तोड़ने पर मजबूर कर दिया। प्रधानमंत्री सचिवालय ने बताया कि बैठक में उन तनावों पर चर्चा हुई जो सुनसरी जिले से शुरू होकर मधेश के कई अन्य जिलों में फैल गए थे।
कानून-व्यवस्था पर मांगे सुझाव
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री शाह ने नेताओं से मधेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उनकी राय मांगी। बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे को लेकर संवेदनशील हैं और गंभीरता से समाधान चाहते हैं। उन्होंने संकट सुलझाने के लिए अपने सुझाव भी दिए। इस संवाद में डॉ. सीके राउत, महंता ठाकुर, राजेंद्र महतो और अमरेश कुमार सिंह समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए, जिनका संकटग्रस्त क्षेत्र में अच्छा जनाधार है।
कैसे शुरू हुई थी हिंसा
यह हिंसा 26 जुलाई को सुनसरी जिले के कप्तानगंज इलाके में शुरू हुई थी। सावन के बोल बम उत्सव के दौरान कांवड़ियों द्वारा बजाए जा रहे तेज संगीत पर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों में बहस हिंसक झड़प में बदल गई। पुलिस के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में गोली लगने से ओम प्रकाश मेहता नामक एक युवक की मौत हो गई। इसके बाद विरोध प्रदर्शन और हिंसा सिराहा, धनुषा और पर्सा जैसे जिलों में भी फैल गई, जिसके चलते कई इलाकों में कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लगानी पड़ी।
विपक्ष ने की थी आलोचना
इससे पहले, विपक्षी दलों ने संकट के समय देश को संबोधित न करने और जरूरी कदम न उठाने के लिए प्रधानमंत्री की कड़ी आलोचना की थी। दबाव बढ़ने पर बालेंद्र शाह ने गुरुवार को राष्ट्र को संबोधित कर शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को भी स्थिति से अवगत कराया था। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने भी हिंदू और मुस्लिम धार्मिक नेताओं के साथ बैठक कर शांति बहाली पर चर्चा की।
इनपुट: IANS



