सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की क्रांति: हर 4 में से 1 स्कूटर अब बैटरी वाला, जानिए क्या कहते हैं आंकड़े

भारत के दोपहिया बाज़ार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तरफ़ ग्राहकों का झुकाव तेज़ी से बढ़ रहा है। आलम यह है कि देश में बिकने वाले हर चार में से लगभग एक स्कूटर…

भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की क्रांति: हर 4 में से 1 स्कूटर अब बैटरी वाला, जानिए क्या कहते हैं आंकड़े
(फोटो: IANS)

भारत के दोपहिया बाज़ार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तरफ़ ग्राहकों का झुकाव तेज़ी से बढ़ रहा है। आलम यह है कि देश में बिकने वाले हर चार में से लगभग एक स्कूटर अब इलेक्ट्रिक है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहिया वाहन ख़रीदने की योजना बना रहे लगभग 43% लोग अब गंभीरता से इलेक्ट्रिक विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जबकि 2024 में यह आँकड़ा सिर्फ़ 30% था।

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रिपोर्ट के अनुसार, हर महीने करीब 1.8 लाख भारतीय अपना पहला इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन घर ला रहे हैं। यह बढ़ती दिलचस्पी बिक्री के आँकड़ों में भी साफ़ झलकती है। मौजूदा वित्त वर्ष 2027 में अब तक (अप्रैल से अगस्त 2026 तक) कुल दोपहिया बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 9.9% हो गई है, जो वित्त वर्ष 2024 में 5.5% थी।

बिक्री में अभूतपूर्व उछाल

ख़ासतौर पर स्कूटर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक मॉडलों ने अपनी मज़बूत पकड़ बना ली है। स्कूटरों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक स्कूटरों का हिस्सा 16.8% (वित्त वर्ष 2024) से बढ़कर 24.1% पर पहुँच गया है। आँकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2026 के बीच इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बिक्री में सालाना 54% की चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई, जो पेट्रोल स्कूटरों की तुलना में तीन गुना से भी ज़्यादा है।

क्यों बदल रही है ग्राहकों की सोच?

रिपोर्ट यह भी बताती है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर ग्राहकों की हिचकिचाहट कम हो रही है। 2024 में जहाँ 38% ग्राहक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन को सिरे से ख़ारिज कर देते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 29% रह गई है। इसके अलावा, वाहनों की अच्छी पिक-अप को पसंद करने वाले ग्राहक 27% से बढ़कर 48% हो गए हैं, और इन्हें भरोसेमंद ब्रांड से जोड़ने वालों का अनुपात 28% से बढ़कर 46% हो गया है।

बीसीजी के प्रबंध निदेशक एवं पार्टनर सौरभ छाजेर ने कहा, "जो ब्रांड आगे रहेंगे, वे वही होंगे जो केवल कीमत के आधार पर नहीं, बल्कि इस बात को ध्यान में रखकर वाहन बनाएंगे कि भारतीय वास्तव में उनका इस्तेमाल कैसे करते हैं। साथ ही, वे सर्विस और बैटरी की विश्वसनीयता से लेकर बीमा और दोबारा बिक्री तक, वाहन के पूरे स्वामित्व के दौरान ग्राहकों का भरोसा जीतेंगे।"

मौजूदा मालिक इलेक्ट्रिक वाहनों की कम परिचालन लागत, आरामदायक सवारी, आकर्षक डिज़ाइन और डिजिटल सुविधाओं जैसे पहलुओं की सराहना करते हैं। हालाँकि, ख़राब सड़कों पर प्रदर्शन और हाईवे पर उपयोग को लेकर कुछ चिंताएँ अभी भी बनी हुई हैं।

इनपुट: IANS

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