हरियाणा के मेवात में 'दुल्हन खरीद-फरोख्त' के आरोप, राष्ट्रीय महिला आयोग ने जांच के लिए बनाई समिति
हरियाणा के मेवात क्षेत्र में शादी के नाम पर महिलाओं की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोपों की जांच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। 'पारो' या 'मोलकी' के नाम से…
हरियाणा के मेवात क्षेत्र में शादी के नाम पर महिलाओं की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोपों की जांच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। 'पारो' या 'मोलकी' के नाम से प्रचलित इस कथित प्रथा के तहत दूसरे राज्यों की आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों को शादी के लिए यहां लाया जाता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एनसीडब्ल्यू ने मीडिया में आई खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है।
आयोग ने पांच सदस्यीय तथ्य-खोज समिति को अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के लिए 10 कार्य दिवस का समय दिया है। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया राहतकर ने इस प्रथा की निंदा करते हुए कहा, "किसी महिला को शादी के नाम पर खरीदा-बेचा नहीं जा सकता और न ही उसे वस्तु की तरह देखा जा सकता है। विवाह सम्मान और समानता का रिश्ता है, कोई लेन-देन नहीं।"
जांच समिति की संरचना और कार्य
इस तथ्य-खोज समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के पूर्व महानिदेशक और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पी.एम. नायर करेंगे। समिति के अन्य सदस्यों में हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक बी.के. सिन्हा, दिल्ली विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर सीमा सिंह, फिल्म निर्माता एवं अभिनेत्री तृप्ति भोइर और एनसीडब्ल्यू के विधि अधिकारी मनमोहन वर्मा शामिल हैं।
समिति 'पारो/मोलकी' प्रथा के स्वरूप, संचालन और इसके प्रसार की गहराई से जांच करेगी। इसकी जांच के दायरे में बिचौलियों की भूमिका और राज्यों के बीच सक्रिय किसी भी संभावित मानव तस्करी नेटवर्क की पड़ताल करना भी शामिल है।
जांच के प्रमुख बिंदु
आयोग के अनुसार, कुछ मामलों में इन महिलाओं को कथित तौर पर दोबारा बेचे जाने, लगातार शोषण और हिंसा का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति अंतरराज्यीय मानव तस्करी और महिलाओं के अधिकारों के घोर उल्लंघन की गंभीर आशंका पैदा करती है। जांच दल नूंह/मेवात और आवश्यकता पड़ने पर अन्य स्थानों का दौरा करेगा। टीम पीड़ित महिलाओं, स्थानीय समुदाय, पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों से बातचीत करेगी।
इसके अलावा, समिति इन महिलाओं से जुड़े कानूनी पहचान, उत्तराधिकार के अधिकार, बाल विवाह, सामाजिक कलंक और उन्हें न्याय व सरकारी सेवाओं तक मिलने वाली पहुंच जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की भी समीक्षा करेगी। विजया राहतकर ने कहा कि यदि जांच में मानव तस्करी या व्यवस्था की कोई विफलता सामने आती है, तो आयोग ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदमों की सिफारिश करेगा।
इनपुट: IANS



