मुंबई: ₹916 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में बड़ी राहत, कोर्ट ने जब्त संपत्ति असली हकदारों को लौटाने का दिया आदेश
मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने एक बड़े फैसले में, बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जब्त की गई 22.40 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को उनके असली हकदारों को लौटाने का निर्देश दिया है…
मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने एक बड़े फैसले में, बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जब्त की गई 22.40 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को उनके असली हकदारों को लौटाने का निर्देश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने खुद अदालत में इन संपत्तियों को रिलीज करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जिससे पीड़ितों को राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला अशर एग्रो लिमिटेड नामक कंपनी से जुड़ा है, जिसके मालिक और नियंत्रक विनोद कुमार चतुर्वेदी और मनोज पाठक थे। ईडी ने चतुर्वेदी, पाठक और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तब शुरू की जब यह पता चला कि उन्होंने बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) के साथ लगभग 916 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी।
धोखाधड़ी और जांच का पूरा मामला
ईडी की जांच में यह बात सामने आई कि कंपनी के प्रमोटरों ने शेल कंपनियों का एक नेटवर्क बनाकर लोन की रकम को व्यवस्थित तरीके से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया। फंड को आगे भेजने और दूसरी जगह लगाने के लिए संबंधित समूह की कंपनियों का भी इस्तेमाल किया गया। इसी जांच के तहत ईडी ने 2021 में 22.40 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया था। बाद में, पीएमएलए के तहत न्याय-निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) ने भी इस कुर्की की पुष्टि कर दी थी।
कानूनी प्रक्रिया और अदालत का फैसला
इसके बाद ईडी ने मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में एक अभियोजन शिकायत भी दायर की, जिसमें इन संपत्तियों को अपराध से हुई कमाई मानते हुए जब्त करने की मांग की गई थी। हालांकि, मामले में एक नया मोड़ तब आया जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने अशर इको पावर लिमिटेड के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू की, जो बाद में विफल हो गई और परिसमापन (liquidation) की कार्यवाही शुरू हुई।
इसके बाद, नियुक्त परिसमापक (Liquidator) ने जब्त संपत्ति वापस पाने के लिए विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया। ईडी ने अदालत को बताया कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) का एक मुख्य उद्देश्य अपराध से हुई कमाई को असली हकदारों को वापस करना है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए, ईडी ने संपत्तियों को रिलीज करने पर अपनी सहमति दे दी। ईडी की दलीलों के आधार पर, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 23 जुलाई को यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
इनपुट: IANS



