MPSC पेपर लीक विवाद: चेयरमैन के छुट्टी पर जाने के बाद पुणे में छात्रों का 11 दिन लंबा आंदोलन समाप्त
पुणे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने अपना 11 दिनों से चल रहा सड़क आंदोलन वापस ले लिया है। यह फैसला महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के चेयरमैन विवेक भीमनवार के छुट्टी पर जाने की…
पुणे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने अपना 11 दिनों से चल रहा सड़क आंदोलन वापस ले लिया है। यह फैसला महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के चेयरमैन विवेक भीमनवार के छुट्टी पर जाने की घोषणा के बाद आया, जो कथित पेपर लीक और प्रशासनिक गड़बड़ियों के आरोपों का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह घटनाक्रम रविवार देर रात चली एक मैराथन बैठक के बाद हुआ।
छात्रों का आंदोलन समाप्त कराने में राज्य के लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्र राजे भोसले, विधायक रोहित पवार और विश्वजीत कदम जैसे राजनीतिक नेताओं की अहम भूमिका रही। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल से लंबी बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
जांच पूरी होने तक छुट्टी पर चेयरमैन
सोमवार सुबह 1:24 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से MPSC चेयरमैन विवेक भीमनवार ने खुद अपने छुट्टी पर जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार ने एमपीएससी पेपर लीक मामले की न्यायिक जांच की घोषणा की है... मैंने इस जांच के पूरा होने तक पद पर काम करते रहने के बजाय इस समय छुट्टी पर जाने का फैसला किया है।" भीमनवार ने यह भी जोर दिया कि आयोग की स्वायत्तता, विश्वसनीयता और छात्रों के हित हमेशा उनकी प्राथमिकता रहे हैं और रहेंगे।
प्रशासनिक फेरबदल और जांच समिति
इस विवाद के समाधान के लिए राज्य सरकार ने दो बड़े कदम उठाए हैं। पहला, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का नया सचिव नियुक्त किया गया है, जिन्हें परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की जिम्मेदारी दी गई है। दूसरा, सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय जांच और समीक्षा समिति के गठन का प्रस्ताव रखा है। यह समिति MPSC की प्रणालीगत खामियों को दूर करने के लिए प्रशासनिक सुधारों पर सलाह देगी।
"यह छात्रों की एकता की जीत है"
आंदोलन की सफलता पर विधायक रोहित पवार ने पत्रकारों से कहा, "हालांकि इसमें देर हुई लेकिन सरकार ने छात्रों की मांगें मान ली हैं। हमारी मुख्य मांग इस्तीफा थी लेकिन छात्रों के एग्जाम को ध्यान में रखते हुए, हमने आंदोलन रोकने का फैसला किया। यह जीत स्टूडेंट्स की एकता की है।" उन्होंने माना कि सरकार ने सीधे इस्तीफा लेने के बजाय चेयरमैन को छुट्टी पर भेजा है, लेकिन इसे छात्रों के लिए एक बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा, "बच्चे एक कदम पीछे हटे लेकिन सरकार दस कदम पीछे हटी।" इसके साथ ही पवार ने घोषणा की कि अब वह विदर्भ के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे।
इनपुट: IANS



