पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी के बाद भड़की हिंसा, गवर्नर हाउस में लगाई गई आग
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहाँ संघीय सरकार द्वारा इमरजेंसी लागू किए जाने के बाद हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन विरोध…
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहाँ संघीय सरकार द्वारा इमरजेंसी लागू किए जाने के बाद हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान पेशावर स्थित गवर्नर हाउस को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे प्रांत में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में गवर्नर हाउस आग की लपटों से घिरा दिख रहा है। हालांकि, आगजनी से हुए नुकसान या किसी के हताहत होने के बारे में तत्काल कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अन्य वीडियो फुटेज में प्रांत के अलग-अलग शहरों में पुलिस को गोलीबारी करते हुए भी देखा जा सकता है।
सरकार की कार्रवाई और पीटीआई का विरोध
यह हिंसा रविवार को उस वक्त भड़की जब केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। इमरजेंसी लागू होने के साथ ही जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार निलंबित हो गई है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियों ने पीटीआई के इस्लामाबाद मार्च को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने स्वाबी में 59 और खैबर जिले में छह पीटीआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पद से हटाए गए मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और पीटीआई के प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर को भी हिरासत में ले लिया गया है। वहीं, एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन खान गंडापुर ने दावा किया है कि उन्हें डेरा इस्माइल खान में उनके घर पर नजरबंद कर दिया गया है।
लोकतंत्र पर हमला: विपक्ष
विपक्षी दलों ने केपी में गवर्नर शासन लगाने के केंद्र के फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कानूनी और सार्वजनिक मंचों पर चुनौती देने का संकल्प लिया है। पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पीटीआई ने एक बयान में चेतावनी दी कि इस फैसले ने एक "खतरनाक मिसाल" कायम की है और यह प्रांत के निर्वाचित नेतृत्व को कमजोर करने के उद्देश्य से किया गया एक राजनीतिक उत्पीड़न है।
पीटीआई ने सोहेल अफरीदी और जुनैद अकबर की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार उनकी हिरासत के कानूनी कारणों और आरोपों का खुलासा करे। तहरीक-ए-तहफुज आयिन-ए-पाकिस्तान (टीटीएपी) ने भी इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि पीटीआई की विरोध प्रदर्शन की योजना पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रहेगी।
इनपुट: IANS



