आत्मनिर्भर भारत की राह: रक्षा, कृषि और ऊर्जा में आत्मनिर्भरता कैसे बदलेगी देश की तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को आर्थिक और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में तीन प्रमुख क्षेत्र — रक्षा उत्पादन, कृषि निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा — निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। समाचार एजेंसी IANS…
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को आर्थिक और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में तीन प्रमुख क्षेत्र — रक्षा उत्पादन, कृषि निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा — निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में विशेषज्ञों ने बताया कि स्वदेशी रक्षा निर्माण, मोटे अनाज (मिलेट्स) को बढ़ावा और ऊर्जा के विविध स्रोतों का विकास देश को एक नई मजबूती देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन क्षेत्रों में हो रही प्रगति भारत की विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करेगी और वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को और सशक्त बनाएगी। यह विश्लेषण ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए 'सप्तधारा' रोडमैप की घोषणा की है, जिसका स्थानीय व्यापारियों ने भी स्वागत किया है।
रक्षा में आत्मनिर्भरता: 50 गुना बढ़ा निर्यात
रक्षा क्षेत्र में भारत की प्रगति उल्लेखनीय रही है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सेवानिवृत्त रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर हेमंत महाजन ने बताया कि 2014 की तुलना में देश का रक्षा उत्पादन लगभग पांच गुना बढ़ गया है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मित्र और पड़ोसी देशों को होने वाले रक्षा निर्यात में करीब 50 गुना की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
ब्रिगेडियर महाजन ने कहा, “आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र केवल आर्थिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता बढ़ने से भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकता है और आपात परिस्थितियों में बाहरी देशों पर निर्भरता से बच सकता है।”
कृषि की नई ताकत: मिलेट्स और मुक्त व्यापार
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट आदित्य सेश ने मिलेट्स यानी मोटे अनाज की बढ़ती अहमियत पर जोर दिया। उनके अनुसार, भारत द्वारा हाल ही में किए गए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) बाजरा, ज्वार और रागी जैसे कृषि उत्पादों के लिए निर्यात के नए दरवाजे खोल सकते हैं। ये फसलें कम पानी में उगती हैं, लंबे समय तक चलती हैं और पोषण से भरपूर होती हैं।
उन्होंने बताया कि इस साल मिलेट्स के दामों में 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है, जो इनकी बढ़ती मांग का संकेत है। सेश ने कहा, “मिलेट्स का उपयोग देश के भीतर तो किया ही जा सकता है, साथ ही इन्हें निर्यात भी किया जा सकता है। आज जिन कई प्रकार के सीरियल बार और स्वास्थ्य उत्पादों का आयात किया जाता है, उनमें मिलेट्स का उपयोग किया जा सकता है।”
ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की तैयारी
आदित्य सेश ने ऊर्जा के क्षेत्र में विविधता लाने की तत्काल आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उनका कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को देखते हुए किसी एक ऊर्जा स्रोत पर निर्भर रहना जोखिम भरा है। उन्होंने एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) के साथ-साथ सौर, पवन, हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा में निवेश बढ़ाने की वकालत की।
उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा वैश्विक माहौल में हर वस्तु को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, इसलिए भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाहरी दबाव उसकी संप्रभुता और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित न कर सकें।
'सप्तधारा' से जगी उम्मीदें
प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 'सप्तधारा' योजना का छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के स्थानीय व्यापारियों ने स्वागत किया है। IANS से बात करते हुए कपड़ा व्यापारी विजय छाबड़ा ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, टेक्नोलॉजी और रक्षा जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों पर सरकार का ध्यान केंद्रित करने से कारोबार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं, अन्य व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि यदि उद्योगों को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराया जाए तो उत्पादन लागत घटेगी, जिसका लाभ ग्राहकों को भी मिलेगा।
इनपुट: IANS



