सोमवार, 17 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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मेघालय: दशकों के विरोध के बाद, यूरेनियम खनन के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी सरकार

मेघालय में दशकों से चले आ रहे यूरेनियम खनन विवाद पर राज्य सरकार ने अपना रुख साफ करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल ने यूरेनियम खनन का विरोध करने वाले एक…

मेघालय: दशकों के विरोध के बाद, यूरेनियम खनन के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी सरकार
(फोटो: IANS)

मेघालय में दशकों से चले आ रहे यूरेनियम खनन विवाद पर राज्य सरकार ने अपना रुख साफ करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल ने यूरेनियम खनन का विरोध करने वाले एक मसौदा प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव को 24 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री संगमा ने गुरुवार को इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस कदम का उद्देश्य यूरेनियम खनन पर सरकार के आधिकारिक रुख को विधानसभा के माध्यम से औपचारिक रूप देना है। यह फैसला राज्य के स्थानीय समुदायों के लंबे समय से चले आ रहे विरोध को देखते हुए लिया गया है।

विवाद के केंद्र में संसाधन और समुदाय

डोमियासियत, वाहकाजी और मावथाबा जैसे प्रस्तावित खनन स्थल इस पूरी बहस के केंद्र में रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, भारत के कुल यूरेनियम भंडार का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा मेघालय में है, जो इसे रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि, इसके खनन से पर्यावरण, स्थानीय समुदायों के हितों और इसके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं।

मेघालय में यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यहां भूमि का स्वामित्व और शासन व्यवस्था विशिष्ट है। जमीन का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों के अधीन है, जिनकी भूमि और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में अहम भूमिका होती है।

विधानसभा में तय होगा अंतिम रुख

स्थानीय संगठन और सामुदायिक समूह दशकों से खनन गतिविधियों के पर्यावरणीय और सामाजिक परिणामों पर चिंता जताते रहे हैं। सरकार अब इस मामले को विधानसभा के समक्ष रखकर एक औपचारिक विधायी मंच प्रदान करना चाहती है। उम्मीद है कि शीतकालीन सत्र में इस पर विस्तृत चर्चा होगी, जिसके बाद यूरेनियम खनन पर राज्य का रुख आधिकारिक तौर पर दर्ज हो जाएगा। यह कदम राज्य के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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