बांग्लादेश में खसरा: टीकाकरण अभियान के बावजूद 700 से ज़्यादा मौतें, विशेषज्ञ चिंतित
बांग्लादेश में खसरे जैसे लक्षणों से होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जो स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवा
बांग्लादेश में खसरे जैसे लक्षणों से होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, जो स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवार सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटों में सात और बच्चों की मौत दर्ज की गई, जिससे 2026 में अब तक इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या 738 हो गई है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के मुताबिक, इन नई मौतों को 'संदिग्ध खसरा' मामलों के तौर पर दर्ज किया गया है। देश में अब तक संदिग्ध खसरे से कुल 645 मौतें हुई हैं, जबकि लैब जांच में पुष्टि के बाद 93 लोगों की जान गई है।
लगातार बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले
डीजीएचएस के आंकड़ों से पता चलता है कि संक्रमण का प्रसार चिंताजनक स्तर पर है। बीते 24 घंटों में 925 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे देश में कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 1,05,618 तक पहुंच गई है। इसी अवधि में 106 नए मामलों की लैब में पुष्टि भी हुई, जिससे अब तक कुल पुष्ट मामलों का आंकड़ा 12,632 हो गया है। 15 मार्च से अब तक 88,844 मरीजों को संदिग्ध खसरे के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 85,122 लोग ठीक हो चुके हैं।
टीकाकरण और रोकथाम में कमी
यह स्थिति तब है जब मई महीने में 1.84 करोड़ बच्चों को टीका लगाने का एक बड़ा अभियान चलाया गया था। द डेली स्टार अखबार के हवाले से जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने बताया कि खसरे के मामले कम न होने के दो मुख्य कारण हैं। पहला, हर इलाके में 95 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल न हो पाना और दूसरा, अस्पतालों और समुदायों में संक्रमण रोकने के नियमों का ठीक से पालन न करना।
हुसैन के अनुसार, आइसोलेशन और क्वारंटीन जैसे जरूरी उपायों को लगभग नजरअंदाज कर दिया गया, जो बीमारी को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समय की कमी के कारण टीकाकरण अभियान की योजना ऑनलाइन बैठकर बनाई गई, जिससे कई बच्चे टीके से वंचित रह गए होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि पांच साल से कम उम्र के सभी बच्चों के लिए घर-घर जाकर एक नया टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए।
इनपुट: IANS



