शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कांगो में इबोला का कहर: इतिहास का सबसे तेज़ी से फैलता प्रकोप, मृतकों की संख्या 1500 के पार

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) इबोला वायरस के अब तक के सबसे तेजी से फैलने वाले प्रकोप का सामना कर रहा है। देश के पूर्वी हिस्से में यह संक्रमण भयावह रूप ले चुका है, जहाँ अब तक 1,500 से ज़्यादा…

कांगो में इबोला का कहर: इतिहास का सबसे तेज़ी से फैलता प्रकोप, मृतकों की संख्या 1500 के पार
(फोटो: IANS)

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) इबोला वायरस के अब तक के सबसे तेजी से फैलने वाले प्रकोप का सामना कर रहा है। देश के पूर्वी हिस्से में यह संक्रमण भयावह रूप ले चुका है, जहाँ अब तक 1,500 से ज़्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर 20 दिन में मामलों की संख्या दोगुनी हो रही है, जिसने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की चिंता भी बढ़ा दी है।

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यूएन ने गुरुवार को चेतावनी दी कि यह महामारी देश में पहले से मौजूद गंभीर मानवीय संकट को और बदतर बना रही है। 15 मई को कांगो सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित यह प्रकोप, बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का है और यह देश में पहले आए सभी 16 इबोला प्रकोपों से ज़्यादा तेज़ी से फैला है।

संक्रमण के चिंताजनक आँकड़े

डीआरसी के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक कुल 3,442 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें से 1,521 लोगों की मौत हो चुकी है। इसका मतलब है कि संक्रमितों में मृत्यु दर लगभग 45 प्रतिशत है। संक्रमण के कुल मामले अब 2018-20 के बड़े प्रकोप के करीब पहुँच रहे हैं, जब 3,470 लोग संक्रमित हुए थे। यह वायरस पूर्वी कांगो के पाँच प्रांतों में फैल चुका है, जहाँ वर्षों से जारी हिंसा और असुरक्षा के कारण स्वास्थ्य सेवाएँ पहले से ही भारी दबाव में हैं। बुनिया और रवामपारा जैसे क्षेत्रों में हर हफ्ते 100 से 150 नए मामले सामने आ रहे हैं।

रोकथाम और इलाज के प्रयास

संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ 20 से ज़्यादा इबोला उपचार केंद्र और स्थानीय स्तर पर जाँच प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं। लोगों से मामूली लक्षण दिखने पर भी तुरंत स्वास्थ्य केंद्र जाने की अपील की जा रही है। इस बीच, जुलाई की शुरुआत में बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ एक नई वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू हुआ है। 15 जुलाई तक लगभग 20 वॉलंटियर्स को इसमें शामिल किया गया था और परीक्षण पूरा होने में करीब चार महीने लग सकते हैं, क्योंकि इस स्ट्रेन का कोई मानक इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

पड़ोसी देश युगांडा ने बढ़ाया मदद का हाथ

पड़ोसी देश युगांडा, जिसने हाल ही में अपने यहाँ इबोला प्रकोप के खत्म होने की घोषणा की थी, ने भी मदद के लिए विशेषज्ञों की एक टीम कांगो भेजी है। ये विशेषज्ञ सीमा से लगे टचोमिया और कासेनी क्षेत्रों में स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर संक्रमण को रोकने के प्रयासों में सहयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर संक्रमण की रफ्तार पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह कांगो के इतिहास का सबसे भयावह इबोला संकट बन सकता है।

इनपुट: IANS

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