मारुति सुजुकी का बड़ा कदम: मानेसर प्लांट में शुरू हुआ ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन, घटेगा कार्बन उत्सर्जन
भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने उत्पादन कार्यों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। कंपनी ने हरियाणा स्थित अपने मानेसर विनिर्माण संयंत्र…
भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपने उत्पादन कार्यों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। कंपनी ने हरियाणा स्थित अपने मानेसर विनिर्माण संयंत्र में एक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम कंपनी की उत्पादन प्रक्रियाओं से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने की व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है।
गुरुवार को शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट की क्षमता 300 किलोवाट है। इस प्लांट में नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) का उपयोग करके ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाएगा। इसके बाद, इस हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर फैक्ट्री के कामों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी।
सौर ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल
मारुति सुजुकी ने बताया कि यह प्रोजेक्ट मानेसर प्लांट में लगे सौर ऊर्जा सिस्टम के बेहतर उपयोग में भी सहायक होगा। अक्सर छुट्टियों या कम उत्पादन वाले दिनों में सौर ऊर्जा का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाता है। अब इस अतिरिक्त बिजली का उपयोग इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए पानी से हाइड्रोजन बनाने में किया जाएगा। इस हाइड्रोजन को स्टोर करके बाद में जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकेगा।
भविष्य के लिए तैयारी
मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी ताकेउची के मुताबिक, कंपनी ने सिर्फ अपने वाहनों के लिए ही नहीं, बल्कि उत्पादन प्रक्रियाओं के लिए भी एक 'मल्टी-पाथवे' रणनीति अपनाई है। उन्होंने कहा, “भारत तेजी से वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है और भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मकता केवल लागत और गुणवत्ता से नहीं, बल्कि कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता से भी तय होगी।”
ताकेउची ने बताया कि कंपनी सौर ऊर्जा, बायोगैस और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में भी निवेश कर रही है। यह सभी पहलें एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने की तैयारी हैं जो कम कार्बन उत्सर्जन वाला और ऊर्जा के मामले में कुशल हो। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030-31 तक अपने उत्पादन कार्यों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को मौजूदा 6.15 लाख टन से घटाकर 2.66 लाख टन तक लाना है। यह प्रोजेक्ट कंपनी के हरियाणा और गुजरात स्थित अन्य प्लांट्स के लिए एक लर्निंग प्लेटफॉर्म का भी काम करेगा।
इनपुट: IANS



