शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: शादी के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना असंवैधानिक

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी कर्मचारी की शादीशुदा बेटी को केवल उसके विवाह के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति (कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट) के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। समाचार…

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: शादी के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना असंवैधानिक
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी कर्मचारी की शादीशुदा बेटी को केवल उसके विवाह के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति (कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट) के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इस तरह के भेदभाव को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन बताया है। यह निर्णय बिहार सरकार की एक नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है।

विज्ञापन

यह मामला सायरा खातून और उनकी बेटी की अपील से जुड़ा है, जिनके पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के उनके दावे को खारिज कर दिया गया था। पटना उच्च न्यायालय ने भी इस खारिज करने के फैसले को सही ठहराया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

बिहार सरकार की नीति को चुनौती

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने बिहार सरकार की 10 दिसंबर, 2014 की उस नीति पर सवाल उठाया, जिसमें अनुकंपा नियुक्ति के लिए सिर्फ तलाकशुदा या पति द्वारा छोड़ी गई बेटियों को ही योग्य माना गया था। अदालत ने इस वर्गीकरण को असंवैधानिक करार दिया।

पीठ ने जोर देकर कहा कि बेटे और बेटी के बीच किसी भी तरह का भेदभाव संवैधानिक रूप से मान्य नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की, “कानून में ऐसी कोई धारणा नहीं हो सकती कि शादी के बाद बेटी अपने मायके से रिश्ते तोड़ लेती है।”

आपत्ति और दावे की स्थिति

बिहार सरकार ने नियुक्ति के दावे को इस आधार पर भी खारिज कर दिया था कि मृतक कर्मचारी के भाई ने इस पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि भाई पहले ही एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (No-Objection Certificate) दे चुका था, जिससे अस्वीकृति का यह आधार भी खत्म हो गया।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया था कि कानूनी रूप से तलाक न होने के बावजूद, वह अपने मायके में ही रह रही थीं और उन्हें अपनी मां और भाई का सहयोग मिल रहा था। इस पर कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति जैसे मामले में बहुत ज्यादा तकनीकी दृष्टिकोण नहीं अपनाया जा सकता।

हाईकोर्ट का आदेश रद्द, पुनर्विचार का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए बिहार के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश की प्रति मिलने के आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के मामले पर गुण-दोष के आधार पर फिर से विचार करें।

इनपुट: IANS

N

News4Social राजनीति डेस्क

News4Social राजनीति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राजनीति और चुनाव से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →