पुणे: कैडेट की मौत पर मैरीटाइम इंस्टीट्यूट को नोटिस, DGMA ने सुरक्षा में गंभीर चूक पर उठाए सवाल
पुणे के एक मैरीटाइम इंस्टीट्यूट में बास्केटबॉल पोल गिरने से एक कैडेट की मौत के मामले में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन (DGMA) ने संस्थान के डायरेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है…
पुणे के एक मैरीटाइम इंस्टीट्यूट में बास्केटबॉल पोल गिरने से एक कैडेट की मौत के मामले में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन (DGMA) ने संस्थान के डायरेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह नोटिस संस्थान पर अपने कैडेट्स के प्रति देखभाल की जिम्मेदारी में गंभीर कमियों का पहली नजर में खुलासा होने के बाद भेजा गया है।
यह दुखद घटना इसी साल 5 अप्रैल की है, जब मरीन इंजीनियरिंग के बीटेक छात्र विशाल वर्मा के ऊपर कैंपस के बास्केटबॉल कोर्ट का एक पोल गिर गया था। सिर में गंभीर चोटें लगने के कारण कुछ ही घंटों में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
जांच में सामने आईं चौंकाने वाली बातें
संस्थान ने 7 अप्रैल को DGMA को घटना की सूचना दी थी, लेकिन मर्केंटाइल मरीन डिपार्टमेंट (MMD), मुंबई द्वारा की गई एक अलग जांच के आधार पर 7 सितंबर को यह कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। MMD की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अप्रैल को शाम करीब 7:35 बजे विशाल वर्मा बास्केटबॉल कोर्ट से गुजर रहे थे, तभी एक पोल उन पर आ गिरा, जिससे वह उसके नीचे फंस गए।
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि दुर्घटना के बाद संस्थान की एम्बुलेंस नहीं पहुंची और घायल कैडेट को एक निजी गाड़ी से अस्पताल ले जाना पड़ा, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
रखरखाव में लापरवाही का आरोप
जांच में यह भी पाया गया कि जिस पोल के गिरने से हादसा हुआ, उसमें जंग लगने, धातु के पतले होने और स्ट्रक्चरल मटीरियल का काफी नुकसान हो चुका था। चौंकाने वाली बात यह है कि 2023 में ही एक दूसरे बास्केटबॉल कोर्ट के पोल में ठीक उसी जगह पर जंग और छेद पाया गया था, जिसे बदल दिया गया था।
हालांकि, जिस कोर्ट (कोर्ट-बी) में हादसा हुआ और एक अन्य कोर्ट (कोर्ट-सी) के पोल के लिए सिर्फ सतही मरम्मत और पेंटिंग की गई थी। DGMA ने अपने नोटिस में कहा है कि इन पोल की संरचनात्मक मजबूती का कोई आकलन या इंजीनियरिंग मूल्यांकन नहीं किया गया था। इस तरह की खराबी की पहचान के बावजूद, पूरे कैंपस में खेल के बुनियादी ढांचे का कोई व्यापक जोखिम मूल्यांकन नहीं किया गया।
संस्थान की जिम्मेदारी पर सवाल
DGMA ने कहा कि इन तथ्यों से पहली नजर में पता चलता है कि मैरीटाइम ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एमटीआई) अपने कैंपस की सुविधाओं के रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा। नोटिस के अनुसार, संस्थान अपने नियंत्रण वाली सुविधाओं के जोखिमों के प्रति उचित देखभाल, दूरदर्शिता और सावधानी बरतने के लिए जिम्मेदार था। इसके अलावा, संस्थान में एक सेफ्टी कमेटी होने के बावजूद, ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे पता चले कि हादसे से पहले उस बास्केटबॉल पोल का कोई विशेष मूल्यांकन किया गया था।
संस्थान के डायरेक्टर को नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है, जिसके बाद आगे की रेगुलेटरी कार्रवाई की जा सकती है।
इनपुट: IANS



