धोखाधड़ी का 26 साल पुराना मामला: कुशल डायमंड्स और दो डायरेक्टरों को 5 साल की जेल, ₹30-30 लाख का जुर्माना
अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने करीब 26 साल पुराने धोखाधड़ी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुंबई स्थित मेसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड और उसके दो निदेशकों को आपराधिक साजिश और…
अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने करीब 26 साल पुराने धोखाधड़ी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुंबई स्थित मेसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड और उसके दो निदेशकों को आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी का दोषी पाया है। इस मामले में कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बकुल जवेरी और डायरेक्टर मजह एस. कपाड़िया को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने 8 सितंबर को दिए अपने फैसले में कंपनी पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जबकि दोनों दोषी डायरेक्टरों पर भी 30-30 लाख रुपये का अलग से जुर्माना लगाया गया है। यह मामला नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (एनएसआईसी) लिमिटेड को हुए लगभग एक करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान से जुड़ा है।
क्या था पूरा मामला?
सीबीआई ने इस केस को 15 मार्च 2000 को दर्ज किया था। आरोप था कि एनएसआईसी, अहमदाबाद के कुछ अधिकारियों ने मेसर्स कुशल डायमंड्स के निदेशकों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। जांच में यह बात सामने आई कि एनएसआईसी ने कंपनी को बिल डिस्काउंटिंग और कच्चे माल की सहायता योजनाओं के तहत कुल 2,34,85,081 रुपये की राशि दी थी।
इसमें से कुछ राशि पुराने बकाए, चेक भुगतान, विदेशी खरीदार से मिली रकम और अर्नेस्ट मनी के तौर पर एडजस्ट हो गई थी। इसके बावजूद, 31 मार्च 1996 तक कंपनी पर 99,96,364 रुपये का अंतिम बकाया रह गया, जिसे एनएसआईसी को हुआ अनुचित नुकसान माना गया।
कब दाखिल हुई चार्जशीट और कौन थे आरोपी?
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 8 जनवरी 2002 को कुल 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें कंपनी कुशल डायमंड्स, उसके तीन डायरेक्टर (बकुल जवेरी, मजह एस. कपाड़िया, सुभाष छनाना) और एनएसआईसी के चार अधिकारी (वीरेन्द्र कुमार सावनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल, राजेश अरोड़ा) शामिल थे।
ट्रायल के दौरान एक आरोपी डायरेक्टर सुभाष छनाना का निधन हो गया, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। वहीं, अदालत ने एनएसआईसी के चारों सरकारी अधिकारियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि कंपनी और उसके दो मौजूदा डायरेक्टरों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
इनपुट: IANS



