महाराष्ट्र: 265 सूखाग्रस्त तालुकों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विशेष समितियां और राहत कोष प्रकोष्ठ बनेंगे
महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे 265 तालुकों के नागरिकों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के राहत एवं पुनर्वास…
महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे 265 तालुकों के नागरिकों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के राहत एवं पुनर्वास विभाग ने शुक्रवार को एक आदेश जारी कर सभी प्रभावित क्षेत्रों में जिला और तालुका स्तर पर स्वास्थ्य समितियों के गठन का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, जरूरतमंद मरीजों तक सीधी वित्तीय मदद पहुँचाने के लिए हर तालुका में मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) का एक विशेष प्रकोष्ठ भी स्थापित किया जाएगा।
यह फैसला 2026 के खरीफ सीजन में 'ट्रिगर-1' सक्रिय होने के बाद घोषित सूखे की स्थिति को देखते हुए लिया गया है। सरकारी संकल्प (जीआर) के मुताबिक, इन उपायों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सूखे से प्रभावित कोई भी नागरिक इलाज या आर्थिक मदद से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री राहत कोष प्रकोष्ठ की भूमिका
प्रभावित तालुकों के प्रत्येक पंचायत समिति कार्यालय में एक मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) प्रकोष्ठ बनाया जाएगा। ये प्रकोष्ठ सबसे पहले मरीजों को आयुष्मान भारत, महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना और श्रम विभाग की स्वास्थ्य कल्याण योजनाओं जैसी सरकारी स्कीमों से जोड़ने का काम करेंगे। यदि कोई मरीज इन योजनाओं के लिए पात्र नहीं है, तो प्रकोष्ठ उसे मुख्यमंत्री राहत कोष से सीधी वित्तीय सहायता के लिए ऑनलाइन आवेदन करने में मार्गदर्शन और पूरी सहायता प्रदान करेगा। जिला कलेक्टर हर प्रकोष्ठ के प्रमुख के रूप में एक चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति करेंगे, जिनकी सहायता के लिए ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा लिपिकीय स्टाफ मुहैया कराया जाएगा।
दो-स्तरीय स्वास्थ्य निगरानी समिति
स्वास्थ्य संबंधी उपायों की प्रभावी निगरानी के लिए दो स्तरों पर समितियां गठित की जाएंगी:
1. तालुका स्तरीय समिति: इसकी अध्यक्षता संबंधित क्षेत्र के विधायक करेंगे, जबकि उप-विभागीय अधिकारी (राजस्व) सह-अध्यक्ष होंगे। इस समिति में तहसीलदार, बीडीओ, नगर परिषद/पंचायत के मुख्य अधिकारी, तालुका स्वास्थ्य अधिकारी और IMA तथा केमिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों सहित कई अन्य सदस्य शामिल होंगे।
2. जिला स्तरीय समिति: जिले के पालक मंत्री इस समिति के अध्यक्ष और जिला कलेक्टर सह-अध्यक्ष होंगे। इसमें जिला परिषद के सीईओ, सरकारी मेडिकल कॉलेज के डीन, सिविल सर्जन, विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के समन्वयक और सामाजिक कार्यकर्ता सदस्य के तौर पर शामिल होंगे।
इन दोनों समितियों को महीने में कम से कम दो बार समीक्षा बैठकें करनी होंगी। उन्हें मेडिकल जांच शिविर लगाने, मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और गर्मी व जलजनित बीमारियों के प्रबंधन का काम भी सौंपा गया है। आदेश में विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त मरीजों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।
इनपुट: IANS



