भारत का 'समुद्रयान' मिशन: 6000 मीटर गहराई में खोज करेगी पनडुब्बी 'मत्स्य-6000', अहम परीक्षण सफल
भारत के महत्वाकांक्षी 'समुद्रयान' मिशन ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस मिशन के तहत गहरे समुद्र में खनिजों और जैव विविधता की खोज के लिए बनाई गई पनडुब्बी 'मत्स्य-6000' ने अपने मानवरहित परीक्षण…
भारत के महत्वाकांक्षी 'समुद्रयान' मिशन ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस मिशन के तहत गहरे समुद्र में खनिजों और जैव विविधता की खोज के लिए बनाई गई पनडुब्बी 'मत्स्य-6000' ने अपने मानवरहित परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित एलएंडटी शिपयार्ड में हुए इन परीक्षणों के बाद यह परियोजना अब अपने अगले चरण के लिए तैयार है, जिससे देश की समुद्री अनुसंधान क्षमताओं को नई मजबूती मिलेगी।
यह पनडुब्बी तीन लोगों को समुद्र में 6,000 मीटर (6 किलोमीटर) की गहराई तक ले जाने के लिए डिजाइन की गई है, जहाँ शोधकर्ता गहरे समुद्र के रहस्यों का पता लगाएंगे। परीक्षणों के दौरान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमईएस) के सचिव श्रीनिवास कुमार तुम्माला और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी) के निदेशक जी. ए. रामदास मौजूद रहे।
स्वदेशी तकनीक से लैस है 'मत्स्य-6000'
एनआईओटी द्वारा डिजाइन और पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विकसित 'मत्स्य-6000' भारत की चौथी पीढ़ी की मानव युक्त पनडुब्बी है। इसका ढाँचा 2.1 मीटर व्यास का एक गोला है, जिसमें तीन चालक दल सदस्य बैठ सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान पनडुब्बी ने तैरने की क्षमता (फ्लोटेशन), पानी के भीतर स्थिरता और बैलास्ट सिस्टम जैसे सभी निर्धारित मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस वाहन में कई उन्नत स्वदेशी प्रणालियाँ लगी हैं, जिनमें गोता लगाने के लिए मुख्य बैलास्ट सिस्टम, कई दिशाओं में गति के लिए थ्रस्टर्स, बिजली के लिए ऑनबोर्ड बैटरी बैंक और उछाल बनाए रखने के लिए सिंथेटिक फोम शामिल हैं।
अत्याधुनिक संचार और सुरक्षा प्रणालियाँ
'मत्स्य-6000' संचार और नेविगेशन के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इसमें सतह और पानी के नीचे संपर्क के लिए एकॉस्टिक मॉडेम, अंडरवाटर टेलीफोन और वीएचएफ रेडियो उपकरण लगे हैं। साथ ही, पानी के नीचे सटीक स्थिति का पता लगाने के लिए एकॉस्टिक पोजिशनिंग सिस्टम और सतह पर जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा भी है।
चालक दल की सुरक्षा के लिए इसके मुख्य ढाँचे के अंदर जीवन-रक्षक प्रणालियाँ, पर्यावरण की निगरानी करने वाले डिस्प्ले और नेविगेशन जॉयस्टिक हैं। वाहन के बाहर तेज रोशनी वाली लाइटें, कैमरे और समुद्र विज्ञान से जुड़े कई सेंसर भी लगाए गए हैं ताकि गहरे समुद्र में स्पष्ट अवलोकन और डेटा संग्रह किया जा सके।
परीक्षण की प्रक्रिया और भविष्य के कदम
'मत्स्य-6000' को 2025 में कट्टुपल्ली सुविधा केंद्र लाया गया था, जहाँ इसके पानी में परीक्षण (वेट टेस्ट) शुरू हुए। तब से इसके कई नियंत्रित परीक्षण किए जा चुके हैं, जिनमें मानव-युक्त और मानवरहित दोनों शामिल हैं। इन परीक्षणों में पावर नेटवर्क, स्थिरता, मानव सुरक्षा प्रणालियों, गति, नेविगेशन और संचार प्रणालियों की बारीकी से जाँच की गई है। इस दौरान, अधिकारियों ने कट्टुपल्ली शिपयार्ड में अनुसंधान पोत 'सागर मंजूषा' की मरम्मत और नवीनीकरण कार्यों का भी जायजा लिया।
इनपुट: IANS



