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महाराष्ट्र में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ़्तार, सरकार ने PPP नीति में किए बड़े बदलाव

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने और 'विकसित महाराष्ट्र 2047' के लक्ष्य को साधने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई…

महाराष्ट्र में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ़्तार, सरकार ने PPP नीति में किए बड़े बदलाव
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने और 'विकसित महाराष्ट्र 2047' के लक्ष्य को साधने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) नीति 2026' में कई बड़े संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक संशोधनों को मंजूरी दे दी गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस नई रूपरेखा का उद्देश्य परियोजनाओं में अधिक स्पष्टता लाना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और काम में तेजी लाना है।

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यह फैसला 'महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन' (मित्र) द्वारा नीति में स्पष्टता और सरलीकरण की मांग के बाद लिया गया, जिसके चलते कुल 11 प्रमुख संशोधन किए गए हैं। ये बदलाव 'विकसित महाराष्ट्र 2047' विजन डॉक्यूमेंट के बिंदु 100 पर आधारित हैं।

नीति में क्या हुए हैं मुख्य बदलाव?

अपडेटेड पॉलिसी में प्रोजेक्ट को मंजूरी देने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। अब सैद्धांतिक मंजूरी की प्रक्रिया से नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप समिति द्वारा की जाने वाली जांच के एक स्तर को हटा दिया गया है, ताकि प्रशासनिक देरी कम हो सके। इसके अलावा, PPP परियोजनाओं की मंजूरी के दौरान 'कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटी' की बैठकों में अब 'मित्र' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को भी आमंत्रित किया जाएगा।

नई नीति में वित्तीय सहायता और जोखिमों को लेकर भी स्पष्टता लाई गई है। इसमें 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF) को साफ तौर पर परिभाषित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 200 करोड़ रुपए की VGF का प्रावधान भी किया गया है। साथ ही, डेवलपर्स और प्रोजेक्ट अथॉरिटी के स्वामित्व और जोखिमों से जुड़े दिशानिर्देश भी अपडेट किए गए हैं।

प्रोजेक्ट मंजूरी की नई प्रक्रिया

संशोधित नीति के तहत प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए एक स्पष्ट वित्तीय सीमा तय की गई है। 25 करोड़ रुपए तक की लागत वाली परियोजनाओं (जिनमें सरकारी सहायता, भूमि या प्रीमियम शामिल है) को 'एम्पावर्ड कमिटी' (सशक्त समिति) से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। वहीं, 25 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं के लिए 'एम्पावर्ड कमिटी' की सिफारिशों के आधार पर 'कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी' (CCI) से अंतिम मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

संपत्ति के मुद्रीकरण पर नया ज़ोर

इस फ्रेमवर्क में एक महत्वपूर्ण नया पहलू 'एसेट मोनेटाइजेशन' (संपत्ति मुद्रीकरण) की अवधारणा का जुड़ना है। क्लॉज 13 के तहत जोड़ी गई इस नई नीति का उद्देश्य सार्वजनिक संपत्तियों, जैसे भूमि और इमारतें, का आर्थिक मूल्य बढ़ाकर राजस्व जुटाना है। यह विशेष रूप से उन संपत्तियों पर लागू होगा जो सामान्य PPP मॉडल में व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नहीं हैं, लेकिन 'विकसित महाराष्ट्र 2047' के लक्ष्यों में योगदान दे सकती हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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