‘डंकी रूट’ मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ED ने दिल्ली के टिकट एजेंट तरुण खोसला को किया गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ‘डंकी रूट’ के नाम से जाने जाने वाले कुख्यात मानव तस्करी मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने दिल्ली के एक टिकट एजेंट…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ‘डंकी रूट’ के नाम से जाने जाने वाले कुख्यात मानव तस्करी मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने दिल्ली के एक टिकट एजेंट तरुण खोसला को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। खोसला पर उस नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार होने का आरोप है, जो पंजाब और हरियाणा के लोगों से लाखों रुपये लेकर उन्हें अवैध और खतरनाक रास्तों से अमेरिका भेजता था।
यह मामला फरवरी 2025 में अमेरिका से निकाले गए 300 से अधिक भारतीय नागरिकों से जुड़ा है, जो स्थानीय तस्करों और माफिया की मदद से दक्षिण और मध्य अमेरिकी देशों की सीमाएं पार कर वहां पहुंचे थे। ED ने 23 अक्टूबर को खोसला को गिरफ्तार किया और एक विशेष पीएमएलए अदालत ने उसे 30 अक्टूबर तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया है।
जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क
ED के मुताबिक, यह जांच पंजाब और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में पता चला कि अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों को कानूनी तरीके से भेजने का झूठा वादा किया जाता था, लेकिन इसके बजाय उनसे 30 लाख से 60 लाख रुपये तक की भारी रकम लेकर ‘डंकी रूट’ के जरिए भेज दिया जाता था।
तरुण खोसला इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी था। वह पंजाब और हरियाणा के कई एजेंटों के साथ मिलकर काम करता था, जो लोगों से पासपोर्ट और पैसे इकट्ठा कर उसे दिल्ली भेजते थे। इसके बाद खोसला गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर और अल साल्वाडोर जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए वीजा और हवाई टिकट का इंतजाम करता था। वह हर व्यक्ति के लिए अवैध रास्ता तय करने और उसकी कीमत निर्धारित करने में मुख्य भूमिका निभाता था।
छापेमारी में भारी नकदी और सोना-चांदी बरामद
इस मामले में ED ने पहले भी कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं। 18 और 19 दिसंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में की गई तलाशी के दौरान अकेले तरुण खोसला के ठिकानों से 4.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 5.9 किलोग्राम सोना और करीब 313 किलोग्राम चांदी जब्त की गई, जिसकी कुल कीमत 19.14 करोड़ रुपये है। इससे पहले 15 दिसंबर को, एजेंसी ने इस मामले से जुड़े एजेंटों की 5.41 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां भी अस्थायी रूप से जब्त की थीं।
जुलाई 2025 में 19 जगहों पर हुई तलाशी के दौरान भी कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, और निकारागुआ व इथियोपिया के फर्जी इमिग्रेशन और वीजा स्टैम्प बरामद हुए थे।
अंतरराष्ट्रीय ‘डोंकर्स’ से भी थे संबंध
जांच में पता चला है कि खोसला सिर्फ टिकट ही नहीं, बल्कि एक ‘इमिग्रेशन-क्लियरेंस फिक्सर’ के तौर पर भी काम करता था। उसके मोबाइल फोन से मिली चैट से खुलासा हुआ है कि वह विदेशी हवाई अड्डों पर भी समन्वय करता था, जिसमें इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए पैसे लेना, यात्रियों को संभालना और डॉलर में भुगतान करना शामिल था। ED ने कहा, “'ओके टू बोर्ड' जैसे निर्देश देना यह साबित करता है कि यात्रा की व्यवस्थाओं पर उसका पूरा नियंत्रण था।”
खोसला ने मेक्सिको में 'माइक' और 'क्रिस्टी' तथा ब्राजील में 'अली' जैसे विदेशी 'डोंकर्स' से भी बातचीत की थी, जो लोगों को सीमा पार कराने और उससे जुड़े भुगतानों का काम संभालते थे।
इनपुट: IANS



