महाराष्ट्र में सूखे का संकट: 304 तालुका प्रभावित, सरकार ने किसानों के लिए राहत पैकेज और 5000 रुपये की अग्रिम मदद का किया ऐलान
महाराष्ट्र में खरीफ मौसम के दौरान बारिश की भारी कमी से उपजे कृषि संकट के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के 304 तालुकाओं को सूखा-प्रभावित घोषित कर दिया गया है, जिसके बाद प्रभावि…
महाराष्ट्र में खरीफ मौसम के दौरान बारिश की भारी कमी से उपजे कृषि संकट के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के 304 तालुकाओं को सूखा-प्रभावित घोषित कर दिया गया है, जिसके बाद प्रभावित किसानों और खेतिहर मजदूरों को राहत देने के लिए कई उपायों पर काम शुरू हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और एकनाथ शिंदे भी शामिल थे।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने घोषणा की कि हर प्रभावित किसान परिवार को दिवाली से पहले सीधे उनके बैंक खाते में 5,000 रुपये की अग्रिम आर्थिक सहायता दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने 3.5 लाख किसानों की कर्जमाफी सूची को अंतिम रूप दे दिया है और इसकी प्रक्रिया जारी है।
राहत के लिए 12-सूत्रीय योजना
राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए कुल 12 बड़ी रियायतें और कल्याणकारी उपाय लागू किए हैं। राहत और पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव पाटिल ने बताया कि जिला कलेक्टरों को फसल के नुकसान का आकलन (पंचनामा) तुरंत शुरू करने का निर्देश दिया गया है ताकि मुआवजा समय पर मिल सके। इन उपायों में शामिल हैं:
- लगान और कर्ज: जमीन का लगान पूरी तरह माफ, कृषि लोन चुकाने की अवधि में विस्तार और वित्तीय संस्थानों द्वारा जबरन वसूली पर रोक।
- बिजली बिल: कृषि पंपों के मौजूदा बिजली बिलों में बड़ी राहत और सूखे से प्रभावित इलाकों में बिजली कनेक्शन न काटने के निर्देश।
- शिक्षा: प्रभावित परिवारों के स्कूल-कॉलेज के छात्रों की परीक्षा फीस पूरी तरह माफ।
- रोजगार और पानी: मनरेगा के नियमों में ढील देकर रोजगार के मौके बढ़ाना और पानी की कमी वाले गांवों-बस्तियों में टैंकरों से जलापूर्ति।
इसके अलावा, सरकार ने जरूरी अनाज का पर्याप्त वितरण और मवेशियों के लिए चारे का विशेष इंतजाम करने का भी आश्वासन दिया है।
सूखे की गंभीरता और सरकारी कदम
यह फैसला राज्य में सूखे की बढ़ती गंभीरता को देखते हुए लिया गया है। इससे पहले 26 सितंबर को 'ट्रिगर-1' नियमों के तहत 255 तालुकाओं को सूखा-ग्रस्त घोषित किया गया था। लेकिन बाद में स्थिति की समीक्षा कर 'ट्रिगर-1' और 'ट्रिगर-2' मानदंडों के तहत 39 और तालुकाओं को इस सूची में जोड़ा गया। मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में भूजल स्तर 3 मीटर से ज्यादा गिर गया है। स्थिति से निपटने के लिए, मुख्यमंत्री ने कहा, "16,000 से ज्यादा अवैध पानी के कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके हैं। शिक्षा शुल्क पूरी तरह माफ़ कर दिया गया है; बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे जबरदस्ती लोन की वसूली या बिजली बिल न वसूलें।"
इनपुट: IANS



