महाराष्ट्र: विमुक्त और घुमंतू जनजातियों को मिलेगा स्थिर जीवन, उपमुख्यमंत्री शिंदे ने किया बड़े आंदोलन का ऐलान
महाराष्ट्र सरकार राज्य के विमुक्त और घुमंतू समुदायों को एक स्थिर और चिंता मुक्त जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की है कि इन 52 जनजातियों को एकजुट कर एक राष्ट्रव्यापी…
महाराष्ट्र सरकार राज्य के विमुक्त और घुमंतू समुदायों को एक स्थिर और चिंता मुक्त जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की है कि इन 52 जनजातियों को एकजुट कर एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा, ताकि उन्हें सहानुभूति नहीं, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकार, सम्मान और न्याय मिल सके।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शिंदे शिवसेना द्वारा आयोजित 'विमुक्त और घुमंतू जनजाति (DNT) अधिकार, न्याय और विकास सम्मेलन 2026' में बोल रहे थे। उन्होंने इन समुदायों के सामने आने वाली प्रशासनिक चुनौतियों को स्वीकार किया, जिनमें जाति प्रमाण पत्र, वोटर आईडी, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच शामिल है। उन्होंने इन समस्याओं को हल करने के लिए सरकार के पूर्ण समर्थन का वादा किया।
ऐतिहासिक अन्याय और संघर्ष
उपमुख्यमंत्री ने इस मौके पर इन समुदायों के ऐतिहासिक संघर्ष को याद किया। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासन ने 'आपराधिक जनजाति अधिनियम' (Criminal Tribes Act) के तहत इन मेहनतकश समुदायों पर अन्यायपूर्ण तरीके से 'जन्मजात अपराधी' होने का कलंक लगा दिया था। 31 अगस्त 1952 को उन्हें इस कलंक से मुक्ति मिली थी, इसलिए यह दिन उनके लिए स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान का प्रतीक है। शिंदे ने जोर देकर कहा, "यह मांग किसी एहसान के लिए नहीं, बल्कि मौलिक अधिकारों और सम्मान के लिए है।"
युवाओं और संस्कृति के लिए योजनाएँ
एकनाथ शिंदे ने कहा कि विमुक्त जनजातियों की पहचान सिर्फ संघर्ष तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें शिक्षा, उद्यमिता और नेतृत्व में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इन समुदायों के युवाओं को डॉक्टर, वकील, इंजीनियर और बिजनेस लीडर बनने की अपनी इच्छा व्यक्त की।
सरकार की विशेष पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य बीमा और स्वरोजगार के लिए आर्थिक मदद जैसी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने 'वसंतराव नाईक विमुक्त जाति और खानाबदोश जनजाति विकास निगम' को और बेहतर बनाने का भी आश्वासन दिया। साथ ही, इन जनजातियों की पारंपरिक कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े सांस्कृतिक सम्मेलन के आयोजन की भी घोषणा की।
इनपुट: IANS



