मुंबई: जुलूस के बाद मारपीट पर वारिस पठान ने की कार्रवाई की मांग, भाषा विवाद और मोहन भागवत पर भी बोले
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने मुंबई में हालिया सांप्रदायिक तनाव और भाषा विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गणेश प्रतिमा पर अंडे फेंकने और ईद मिलादुन्नबी…
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने मुंबई में हालिया सांप्रदायिक तनाव और भाषा विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गणेश प्रतिमा पर अंडे फेंकने और ईद मिलादुन्नबी जुलूस के बाद हुई मारपीट की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि शहर का माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पठान ने बताया कि उनकी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई पुलिस के अधिकारियों से मुलाकात की है। उन्होंने आरोप लगाया कि लालबाग-परेल इलाके में जुलूस के बाद कुछ लोगों के साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया, जिसके कई वीडियो भी सामने आए हैं। AIMIM नेता ने पुलिस से आग्रह किया है कि इन वीडियो की जांच कर दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
विभिन्न मुद्दों पर AIMIM का पक्ष
एक साथ कई मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए वारिस पठान ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए बयान की आलोचना की। भागवत ने कहा था कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले हिंदू नहीं हो सकते। पठान ने इसे 'दोहरा मापदंड' बताते हुए सवाल उठाया कि अगर RSS प्रमुख ऐसी सोच का विरोध करते हैं तो भारत में नफरत भरे बयानों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
इसी क्रम में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान में मिले सम्मान को लेकर भी टिप्पणी की। पठान ने कहा कि जिस क्षेत्र का संबंध मुगल शासक बाबर से रहा है, वहां प्रधानमंत्री को सम्मान मिलना उन लोगों के लिए जवाब है जो देश में बाबर के नाम पर राजनीति करते हैं। उन्होंने नफरत की राजनीति छोड़कर देश को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
भाषा विवाद और सवाल पूछने का अधिकार
राज ठाकरे पर हिंदी-मराठी भाषा विवाद को हवा देने का आरोप लगाते हुए पठान ने कहा कि वह मराठी भाषा का सम्मान करते हैं और महाराष्ट्र में रहने वालों को इसे सीखना चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर किसी से मारपीट करना गलत है। उन्होंने कहा, "मुंबई में उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात जैसे राज्यों से लोग रोजगार के लिए आते हैं। उन्हें मराठी सीखने के लिए समय दिया जाना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि कथित तौर पर यह दबाव सिर्फ गरीब और कमजोर लोगों पर बनाया जाता है, बड़े उद्योगपतियों और फिल्मी सितारों पर नहीं।
अंत में, वारिस पठान ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का समर्थन किया जिसमें छात्रों के सवाल पूछने के अधिकार की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां नागरिकों को सरकार की नीतियों पर सवाल करने का संवैधानिक अधिकार है।
इनपुट: IANS



