झीरम घाटी मामला: भूपेश बघेल का आरोप - जांच को सुनियोजित तरीके से दबा रही है भाजपा
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस पूरे मामले को एक सुनियोजित तरीके से दबाने की…
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी मामले की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस पूरे मामले को एक सुनियोजित तरीके से दबाने की कोशिश कर रही है। सोमवार को रायपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले की ठीक से जांच नहीं की, जिसके कारण अदालत का फैसला अपेक्षित था।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भूपेश बघेल ने कहा कि एनआईए ने जांच के दौरान षड्यंत्रकारियों के पहलू पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि गरबा थाने में दर्ज एफआईआर में जिन लोगों के नाम थे, उनसे कोई पूछताछ नहीं की गई और न ही मामले से जुड़े अन्य लोगों से ढंग से सवाल-जवाब हुए। उनका मानना है कि अगर जांच सही तरीके से होती तो आज ऐसी स्थिति नहीं बनती।
जांच की अनुमति नहीं मिली
अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए बघेल ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई मध्य क्षेत्र की बैठक में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा, "उस वक्त मैंने इस मामले को उठाया था और कहा था कि अगर आप इस मामले की जांच नहीं कर पा रहे हैं तो हमें इसकी जांच की जिम्मेदारी दे दीजिए। हम सब कुछ अच्छे से संभाल लेंगे, क्योंकि यह पूरा मामला हमारा है।"
उन्होंने आगे बताया, "यह हम विश्वास दिलाते हैं, लेकिन तब हमें इस मामले की जांच की जिम्मेदारी देने से साफ इनकार कर दिया गया था और कहा था कि हम आपको इस मामले की जांच की जिम्मेदारी कभी नहीं देंगे। आप भूल जाइए।"
न्यायिक प्रक्रिया और सरकार बदलने का असर
पूर्व मुख्यमंत्री ने मामले से जुड़े कानूनी घटनाक्रम का भी ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि जब वे हाईकोर्ट गए तो फैसला एनआईए के पक्ष में आया। इसके बाद जब उनकी सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया तो एनआईए हाईकोर्ट चली गई। बघेल ने कहा, "इसके बाद हमने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। अब सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के पक्ष में फैसला आया। तब तक हमारी सरकार जा चुकी थी।"
उन्होंने अंत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बावजूद वर्तमान राज्य सरकार ने न तो एसआईटी का गठन किया और न ही मामले की ठीक से जांच करवाई, जो यह दिखाता है कि मामले को दबाने की कोशिश हो रही है।
इनपुट: IANS



