सेंथिल बालाजी को जमानत शर्तों में बड़ी राहत, मद्रास हाईकोर्ट ने पेशी की अनिवार्यता हटाई
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को मद्रास हाईकोर्ट से एक मामले में बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत की उस शर्त को हटा दिया है, जिसके तहत उन्हें दिन में…
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को मद्रास हाईकोर्ट से एक मामले में बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत की उस शर्त को हटा दिया है, जिसके तहत उन्हें दिन में दो बार जांच अधिकारी के सामने पेश होना पड़ता था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह फैसला जस्टिस जी.के. इलंथिरायण ने दोनों भाइयों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया।
यह मामला कथित 'हॉर्स-ट्रेडिंग' से जुड़ा है, जिसमें कृष्णगिरि जिले के उथंगराई विधानसभा क्षेत्र से टीवीके विधायक इलैयाराजा को लुभाने के प्रयास के आरोप लगे थे। इसी सिलसिले में ट्रिप्लिकेन पुलिस ने मामला दर्ज किया था और बालाजी बंधुओं को पूछताछ के लिए समन भेजा था।
पेशी की शर्त और उस पर रोक
गिरफ्तारी की आशंका के चलते सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार ने अग्रिम जमानत के लिए मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया था। जस्टिस इलंथिरायण ने उन्हें इस शर्त पर अग्रिम जमानत दी थी कि वे हर दिन सुबह 10.30 बजे और शाम 5.30 बजे जांच अधिकारी के समक्ष पेश होंगे। दोनों भाई इस निर्देश का पालन करते हुए पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगा रहे थे।
बाद में, दोनों ने इस शर्त में ढील देने की मांग करते हुए फिर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनके वकील ने अदालत को बताया कि मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ पहले ही इस मामले में ट्रिप्लिकेन पुलिस द्वारा की जा रही पूरी जांच पर रोक लगा चुकी है।
अदालत का अंतिम फैसला
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जब मुख्य मामले की जांच ही रुकी हुई है, तो उन्हें दिन में दो बार पेश होने के लिए बाध्य करने का कोई औचित्य नहीं है। इस तर्क को स्वीकार करते हुए जस्टिस इलंथिरायण ने दोनों को पुलिस स्टेशन में पेश होने की शर्त से मुक्त कर दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी उन्हें समन जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है।
इनपुट: IANS



