मध्य प्रदेश में 200 साल पुराने कानून खत्म, CM मोहन यादव ने बताया वक्त की जरूरत
मध्य प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 900 से अधिक ऐसे पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त कर दिया है, जो अब अपनी उपयोगिता खो चुके थे। इनमें से कुछ कानून तो 1812 और 1817 जितने पुराने…
मध्य प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 900 से अधिक ऐसे पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त कर दिया है, जो अब अपनी उपयोगिता खो चुके थे। इनमें से कुछ कानून तो 1812 और 1817 जितने पुराने, यानी दो सदियों से भी ज्यादा समय से चले आ रहे थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य कानूनी व्यवस्था को आज की जरूरतों के हिसाब से अधिक प्रासंगिक और प्रभावी बनाना है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को जबलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियों के साथ ये कानून बेअसर हो चुके थे, इसलिए इन्हें हटाना आवश्यक था ताकि कानूनी तंत्र आज की जनता के हितों के अनुरूप काम कर सके।
न्याय व्यवस्था में सुधार और प्रधानमंत्री का आभार
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे कानूनी सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था को पुराने और अप्रासंगिक औपनिवेशिक कानूनों से मुक्त कर वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप नई दिशा देने का काम किया है।" यह टिप्पणी उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे से मुलाकात के दौरान की।
लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता
सीएम यादव ने भारत के मजबूत लोकतंत्र में स्वतंत्र न्यायपालिका और निर्वाचित सरकारों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यह है कि न्यायपालिका अपनी जिम्मेदारियों का स्वतंत्र रूप से निर्वहन करती है, वहीं निर्वाचित सरकारें संवैधानिक ढांचे के भीतर रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करती हैं।" उन्होंने पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान की राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्य दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाते हैं।
अपने जबलपुर दौरे के तहत मुख्यमंत्री ने शहर के प्राकृतिक और आध्यात्मिक महत्व की भी प्रशंसा की। उन्होंने नर्मदा नदी और भेड़ाघाट की संगमरमर चट्टानों का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा बताया।
इनपुट: IANS



