इनकम टैक्स रिटर्न: बिना ऑडिट वाले कारोबारियों के लिए आज आखिरी मौका, चूकने पर लगेगा जुर्माना
अगर आप किसी व्यवसाय या पेशे से आय अर्जित करते हैं और आपके खातों का ऑडिट कराना अनिवार्य नहीं है, तो आयकर रिटर्न (ITR) भरने के लिए आज यानी 31 अगस्त 2026 आखिरी दिन है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आयकर…
अगर आप किसी व्यवसाय या पेशे से आय अर्जित करते हैं और आपके खातों का ऑडिट कराना अनिवार्य नहीं है, तो आयकर रिटर्न (ITR) भरने के लिए आज यानी 31 अगस्त 2026 आखिरी दिन है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आयकर विभाग ने इन करदाताओं को अंतिम बार याद दिलाते हुए कहा है कि वे बिना देर किए आज ही अपना रिटर्न दाखिल और सत्यापित कर दें।
विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि आकलन वर्ष 2026-27 के लिए अब तक 7 करोड़ से ज़्यादा आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं। अपने पोस्ट में विभाग ने स्पष्ट किया, "व्यवसाय या पेशेवर आय वाले ऐसे करदाता जो ऑडिट के दायरे में नहीं आते, उनके लिए 31 अगस्त 2026 अंतिम तिथि है। अंतिम समय तक इंतजार न करें और आज ही अपना आईटीआर दाखिल करें।"
समय सीमा चूकने के क्या हैं नुकसान?
अगर कोई पात्र करदाता आज की समय सीमा तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है, तो उसे कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें सबसे पहले विलंब शुल्क (late fee) शामिल है। आयकर नियमों के मुताबिक, 5 लाख रुपये से ज़्यादा की कुल आय पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। वहीं, अगर आय 5 लाख रुपये से कम है, तो यह शुल्क 1,000 रुपये होगा।
इसके अलावा, बकाया टैक्स पर धारा 234ए के तहत प्रति माह 1% की दर से ब्याज भी चुकाना पड़ सकता है। समय पर रिटर्न न भरने से रिफंड मिलने में भी देरी होती है और कुछ विशेष कर लाभ भी समाप्त हो जाते हैं।
विलंबित रिटर्न का विकल्प, लेकिन शर्तों के साथ
हालांकि, जो करदाता आज रिटर्न नहीं भर पाएंगे, उनके पास 31 दिसंबर 2026 तक विलंबित रिटर्न (belated return) दाखिल करने का एक मौका रहेगा, बशर्ते कि विभाग ने उससे पहले निर्धारण प्रक्रिया पूरी न कर दी हो। लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विलंबित रिटर्न भरने पर व्यावसायिक या पूंजीगत घाटे (business or capital losses) को अगले वर्षों के लिए आगे ले जाने की सुविधा खत्म हो जाती है।
सही फॉर्म और जानकारी का रखें ध्यान
आयकर विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे रिटर्न दाखिल करते समय सही फॉर्म चुनें और अपनी आय की जानकारी पूरी सटीकता से भरें। वित्तीय आंकड़ों का वार्षिक सूचना विवरण (AIS) से मिलान करना भी ज़रूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गलती या नोटिस की स्थिति से बचा जा सके। आमतौर पर, व्यवसाय या पेशे से आय वाले व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए आईटीआर-3 होता है, जबकि अनुमानित कराधान योजना (presumptive taxation scheme) चुनने वालों के लिए आईटीआर-4 (सुगम) उपलब्ध है।
इनपुट: IANS



