GST 2.0 से अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती, पश्चिम एशिया संकट का असर झेल गया भारत: मारुति चेयरमैन
मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर.सी. भार्गव का मानना है कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) में हुए सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक ऐसी मजबूती दी है, जिससे वह पश्चिम एशिया में युद्ध से पैदा हुई वैश्विक…
मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर.सी. भार्गव का मानना है कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) में हुए सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक ऐसी मजबूती दी है, जिससे वह पश्चिम एशिया में युद्ध से पैदा हुई वैश्विक अस्थिरता का भी डटकर सामना कर सकी। कंपनी की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर ये सुधार नहीं हुए होते, तो पिछले कुछ मुश्किल महीनों में देश का आर्थिक प्रदर्शन इतना अच्छा नहीं रहता।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भार्गव ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट के नकारात्मक प्रभावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर रही है और इसका प्रमाण जीएसटी कलेक्शन का रिकॉर्ड स्तर पर बने रहना है। उन्होंने इन "ऐतिहासिक सुधारों" के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सरकार के अन्य सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
ऑटो सेक्टर का भविष्य और मारुति की तैयारी
भार्गव ने भारतीय कार उद्योग के लिए एक बेहद सकारात्मक भविष्य का अनुमान लगाया है। उन्होंने कहा कि 2031 तक भारत में कारों का बाजार 61 लाख से 63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। मारुति सुजुकी इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता में भारी विस्तार कर रही है।
कंपनी की योजना 2026-27 के अंत तक अपनी स्थापित क्षमता को 29 लाख यूनिट और 2030-31 तक 36.5 लाख यूनिट तक ले जाने की है। इस विस्तार के लिए मारुति ने अगले पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2031 तक) के लिए अपना पूंजीगत खर्च बढ़ाकर 77,500 करोड़ रुपये कर दिया है। भार्गव ने कहा, "हम यह सारा विस्तार इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था में विकास की बहुत संभावना है।"
सुधारों की निरंतरता पर जोर
भार्गव ने केवल जीएसटी की प्रशंसा ही नहीं की, बल्कि भविष्य में भी सुधारों की प्रक्रिया जारी रखने की वकालत की। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे कारोबार करने में आसानी (ease of doing business) को और बेहतर बनाने के प्रयास जारी रखें। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल भ्रष्टाचार और देरी को कम करने में मदद करता है।
उनके मुताबिक, इन सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है, जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं और रोजगार के अधिक अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जितनी तेजी से देश में संपत्ति का निर्माण होगा, उतनी ही तेजी से सरकारी राजस्व भी बढ़ेगा, जिससे सरकारी कार्यक्रमों के जरिए विकास का लाभ अधिक समान रूप से फैलेगा।
इनपुट: IANS



