कोलकाता: कम ब्याज पर लोन का झांसा देकर ठगी, पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर रैकेट का किया पर्दाफाश
कोलकाता में पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो प्रतिष्ठित कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर लोगों को कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देता था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अ
कोलकाता में पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो प्रतिष्ठित कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर लोगों को कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देता था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य उपकरण जब्त किए हैं।
यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब मेटियाब्रुज इलाके की एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। महिला ने बताया कि कुछ लोगों ने खुद को 'टाटा कैपिटल फाइनेंस' का कर्मचारी बताकर उसे 2.18 लाख रुपये का लोन दिलाने का वादा किया था। उसका विश्वास जीतने के लिए धोखेबाजों ने कंपनी के नकली दस्तावेज और एक फर्जी डिमांड ड्राफ्ट भी दिखाए।
इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, बीमा और दस्तावेजीकरण शुल्क के नाम पर महिला से किस्तों में कुल 25,450 रुपये ले लिए गए। जब उसे वादा किया गया लोन नहीं मिला, तो उसे ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस की जांच और गिरफ्तारियां
शिकायत मिलने के बाद कोलकाता पुलिस के पोर्ट डिवीजन के साइबर सेल और मेटियाब्रुज पुलिस स्टेशन ने एक संयुक्त जांच शुरू की। तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया गया, जो बोबाजार और पटुलिया इलाकों में थी।
पुलिस की एक विशेष टीम ने 9 जुलाई को बोबाजार थाना क्षेत्र में दो जगहों पर एक साथ छापेमारी की, जहां लोन देने की आड़ में दो फर्जी कॉल सेंटर चलाए जा रहे थे। मौके से नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों से पूछताछ में पता चला कि यह नेटवर्क और भी बड़ा है। उनकी निशानदेही पर शनिवार को पटुली थाना क्षेत्र से सुधीर महतो नाम के एक और आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जिससे गिरफ्तारियों की कुल संख्या 10 हो गई।
बरामद सामान और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के पास से 48 कीपैड मोबाइल फोन, एक स्मार्टफोन, एक लैपटॉप, छह सिम कार्ड, दो नकली रबर स्टैम्प और कई फोन नंबरों की सूची बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार लोगों से पूछताछ जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल है और उन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
इनपुट: IANS



