रविवार, 23 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

बंगाल: दो बड़े अग्निकांडों के बाद जागी सरकार, होटलों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया में होंगे बड़े बदलाव

पश्चिम बंगाल में हाल ही में दो अलग-अलग होटलों में हुए अग्निकांडों में 18 लोगों की जान जाने के बाद राज्य सरकार हरकत में आ गई है। इन घटनाओं ने होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस को लाइसेंस जारी करने की मौजूदा…

बंगाल: दो बड़े अग्निकांडों के बाद जागी सरकार, होटलों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया में होंगे बड़े बदलाव
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में हाल ही में दो अलग-अलग होटलों में हुए अग्निकांडों में 18 लोगों की जान जाने के बाद राज्य सरकार हरकत में आ गई है। इन घटनाओं ने होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस को लाइसेंस जारी करने की मौजूदा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है, जिसके चलते अब पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर उसमें सुधार की तैयारी शुरू हो गई है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान लाइसेंस देने की प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत कर दिया गया था। इसके तहत हॉस्पिटैलिटी प्रतिष्ठानों के मालिकों से एक 'स्व-घोषणा' (Self-Declaration) लेकर स्थानीय फायर स्टेशन के अधिकारियों को ही 'फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट' और 'फायर लाइसेंस' जारी करने का अधिकार दे दिया गया था।

लाइसेंसिंग की पुरानी व्यवस्था में खामियां

राज्य अग्निशमन सेवा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह व्यवस्था प्रक्रिया को तेज करने के लिए लागू की गई थी। लेकिन इसका नतीजा यह हुआ कि इन दो महत्वपूर्ण प्रमाणपत्रों के मिलते ही नगर निकायों से ट्रेड लाइसेंस और बिजली कंपनियों से बिजली कनेक्शन हासिल करना बेहद आसान हो गया। अधिकारी के अनुसार, संबंधित विभागों द्वारा शायद ही कोई क्रॉस-चेक किया जाता था, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गुंजाइश बनी रहती थी।

अब बीरभूम जिले के तारापीठ और कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट में हुई त्रासदियों के बाद सरकार इन कमियों को दूर करने के लिए नीतिगत बदलाव पर विचार कर रही है।

क्या होंगे नए बदलाव?

प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच की व्यवस्था लागू करना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सबसे पहले फायर स्टेशन अधिकारियों के पूर्ण अधिकार को खत्म करने पर विचार किया जा रहा है।

नई दो-चरणीय जांच प्रक्रिया: इसके बजाय, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस जारी करने से पहले दो स्तरों पर जांच होगी। पहली जांच स्टेशन अधिकारी करेंगे और दूसरी जांच उनसे एक या दो स्तर ऊपर के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।

क्रॉस-चेकिंग होगी अनिवार्य: एक और अहम प्रस्ताव यह है कि नगर निकायों और बिजली वितरण कंपनियों को सिर्फ फायर विभाग के प्रमाणपत्रों के आधार पर स्वतः ट्रेड लाइसेंस या बिजली कनेक्शन देने की व्यवस्था खत्म की जाए। उन्हें अपने स्तर पर भी पूरी जांच करनी होगी, ताकि सुरक्षा पहलुओं से कोई समझौता न हो।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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