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महाराष्ट्र: खरीफ बुआई 95% पर, पर मराठवाड़ा में सूखे का साया, फसलें मुरझाने लगीं

मुंबई: महाराष्ट्र में इस साल खरीफ फसलों की बुआई का आंकड़ा औसत के 95 प्रतिशत तक तो पहुंच गया है, लेकिन बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बन रहे…

महाराष्ट्र: खरीफ बुआई 95% पर, पर मराठवाड़ा में सूखे का साया, फसलें मुरझाने लगीं
(फोटो: IANS)

मुंबई: महाराष्ट्र में इस साल खरीफ फसलों की बुआई का आंकड़ा औसत के 95 प्रतिशत तक तो पहुंच गया है, लेकिन बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं, जहां फसलें पानी की कमी से मुरझाने लगी हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 31 अगस्त तक राज्य में कुल 1.36 करोड़ हेक्टेयर में बुआई हुई है, जो पिछले पांच साल के औसत से लगभग 8 लाख हेक्टेयर कम है।

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कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अगस्त के अंत तक खरीफ की बुआई लगभग पूरी हो जाती है, इसलिए इन आंकड़ों में अब और बढ़ोतरी की उम्मीद कम है। इस साल बुआई का रकबा पिछले साल के 1.42 करोड़ हेक्टेयर के मुकाबले भी कम रहा है। मानसून की धीमी शुरुआत और फिर अगस्त में लंबे सूखे ने फसलों की प्रगति रोक दी, जिसका असर अब दिखने लगा है।

क्षेत्रीय असमानता: कहीं बंपर बुआई, कहीं सूखा

राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बुआई की तस्वीर बिल्कुल अलग है। एक तरफ जहां कुछ जिलों ने 100% का लक्ष्य पार कर लिया, वहीं कई इलाके 70-80% पर ही सिमट कर रह गए।

  • पुणे संभाग (101%): सबसे अच्छा प्रदर्शन पुणे संभाग का रहा, जहां सोलापुर में 104% बुआई हुई।
  • नाशिक संभाग (98%): नाशिक जिले ने 101% के साथ संभाग में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया।
  • विदर्भ क्षेत्र (94%): अमरावती और नागपुर दोनों संभागों में बुआई 94% रही। हालांकि, नागपुर के गोंदिया जिले में 113% बुआई हुई, तो चंद्रपुर 88% पर पिछड़ गया।
  • मराठवाड़ा क्षेत्र (93-94%): छत्रपति संभाजीनगर और लातूर संभागों में बुआई क्रमशः 93% और 94% दर्ज की गई। लेकिन लातूर के हिंगोली जिले में यह आंकड़ा सिर्फ 81% रहा।
  • कोंकण क्षेत्र (83%): सबसे कम बुआई तटीय कोंकण में हुई, जहां रायगढ़ जिला सिर्फ 67% पर सिमट गया।

कैबिनेट बैठक में होगी स्थिति की समीक्षा

IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, मराठवाड़ा में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए किसान चिंतित हैं। उनका कहना है कि अगर एक हफ्ते में बारिश नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर फसलें बर्बाद हो सकती हैं। इस उभरते संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में होने वाली साप्ताहिक कैबिनेट बैठक में बुआई की स्थिति, 3000 से अधिक जलाशयों में पानी के स्तर, मराठवाड़ा के हालात और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर समीक्षा की जाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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