केरल: जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं देने की योजना पर डॉक्टरों ने उठाए सवाल, दी चेतावनी
केरल सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना को उसके शुरुआती दौर में ही डॉक्टरों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। योजना का उद्देश्य राज्य के मेडिकल कॉलेजों का बोझ कम करना और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को…
केरल सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना को उसके शुरुआती दौर में ही डॉक्टरों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। योजना का उद्देश्य राज्य के मेडिकल कॉलेजों का बोझ कम करना और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को जिला व सामान्य अस्पतालों में चौबीसों घंटे उपलब्ध कराना है। हालांकि, सरकारी डॉक्टरों के संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने इसके लिए नए पद नहीं बनाए और खाली पड़ी जगहों को नहीं भरा, तो यह सुधार मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी पड़ सकता है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल सरकार चिकित्सा अधिकारी संघ (KGMOA) ने इस पहल का स्वागत तो किया है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि सिर्फ मौजूदा डॉक्टरों को एक जगह से दूसरी जगह तैनात करके इस योजना को लागू नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे राज्य की त्रि-स्तरीय सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मजबूत होने के बजाय कमजोर हो सकती है।
क्या है सरकार की योजना?
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने इस पहल को लोगों के घरों के पास विशेषज्ञ इलाज पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। योजना के पहले चरण में अगले 6 महीनों के भीतर हर जिले के कम से कम एक जिला या सामान्य अस्पताल को शामिल किया जाएगा। इन अस्पतालों में चिकित्सा, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, बाल रोग और स्त्री रोग जैसे विशेषज्ञ विभाग होंगे और रात के समय भी आपातकालीन सर्जरी की सुविधा मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का बढ़ता दबाव कम होगा।
डॉक्टरों ने क्यों जताई चिंता?
KGMOA के अध्यक्ष पीके सुनील और महासचिव जोबिन जी. जोसेफ ने एक बयान में कहा कि जिला अस्पतालों में मौजूदा मानव संसाधन 24 घंटे की विशेषज्ञ सेवा देने के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने तुलना करते हुए बताया, "चौबीसों घंटे देखभाल प्रदान करने वाले मेडिकल कॉलेज के एक विभाग में लगभग 100 डॉक्टर हो सकते हैं, जिनमें संकाय सदस्य, वरिष्ठ रेजिडेंट और कनिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर शामिल हैं।" इसके विपरीत, "कई जिला और सामान्य अस्पतालों में कुछ विभागों में सिर्फ तीन या चार विशेषज्ञ ही होते हैं।"
एसोसिएशन ने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के करीब 800 पद पहले से ही खाली हैं। इनमें विशेषज्ञ कैडर में लगभग 300 और सामान्य कैडर में 476 पद शामिल हैं। अकेले कासरगोड, कन्नूर और पलक्कड़ जिलों में ही डॉक्टरों के 100 से ज्यादा पद रिक्त हैं। डॉक्टरों को यह भी डर है कि इस योजना के लिए स्थानांतरण करने से प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी हो जाएगी, जो टीकाकरण और मातृ-शिशु देखभाल जैसी बुनियादी सेवाएं देते हैं। संगठन ने सरकार से नए पद बनाने और मौजूदा रिक्तियों को तत्काल भरने का आग्रह किया है।
इनपुट: IANS



