केरल PSC परीक्षा घोटाला: चेयरमैन एम.आर. बैजू पर बढ़ा दबाव, BJP ने की बर्खास्तगी की मांग
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) में कथित परीक्षा धांधली का मामला गहराता जा रहा है, जिससे चेयरमैन एम.आर. बैजू पर दबाव बढ़ गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एक विशेष जांच दल (SIT) इस घोटाले की…
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) में कथित परीक्षा धांधली का मामला गहराता जा रहा है, जिससे चेयरमैन एम.आर. बैजू पर दबाव बढ़ गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एक विशेष जांच दल (SIT) इस घोटाले की जांच कर रहा है और अब चेयरमैन बैजू से दोबारा पूछताछ की तैयारी में है। इस बार उनके साथ गिरफ्तार एडिशनल सेक्रेटरी आर. हरि को भी बिठाकर आमने-सामने पूछताछ की जाएगी।
यह मामला स्टेट प्लानिंग बोर्ड में 'चीफ' के पद के लिए आयोजित परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि एक फर्जी सॉफ्टवेयर लॉगिन का इस्तेमाल कर मूल्यांकन प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया था। इस वजह से कई उम्मीदवारों के कुछ सवालों के जवाब जांचे ही नहीं गए।
परीक्षा मूल्यांकन में क्या गड़बड़ी हुई?
परीक्षा के पहले पेपर में कुल 228 उम्मीदवार शामिल हुए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि 58 अंकों वाले सवाल नंबर 10 से 18 तक किसी भी उम्मीदवार के लिए चेक नहीं किए गए। जांच के मुताबिक:
- 51 उम्मीदवारों के लिए केवल सवाल नंबर 1 से 9 और 18 से 28 तक ही जाँचे गए।
- बाकी 177 उम्मीदवारों के लिए सिर्फ सवाल नंबर 1 से 8 और 18 से 28 तक का मूल्यांकन हुआ।
इस मामले में हिरासत में लिए गए एडिशनल सेक्रेटरी आर. हरि ने 10 सवालों की जांच न होने में अपनी भूमिका से इनकार किया है। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि इसकी जिम्मेदारी रिटायर हो चुके डिप्टी सेक्रेटरी सतीश की थी। हालांकि, एसआईटी ने उनके इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया है।
चेयरमैन बैजू की भूमिका पर सवाल
क्राइम ब्रांच को संदेह है कि ये सभी गड़बड़ियां चेयरमैन बैजू के मनमाने फैसलों के कारण हुईं। PSC के अन्य सदस्यों ने भी जांचकर्ताओं को बताया है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल और उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करने वाले अधिकारियों को चुनने का फैसला अकेले बैजू ने ही लिया था। आयोग के सेक्रेटरी साजू जॉर्ज ने भी क्राइम ब्रांच को दिए अपने बयान में कहा है कि बैजू बिना किसी से सलाह लिए फैसले लेते थे और विवाद होने पर अधिकारियों पर दोष मढ़ देते थे।
राजनीतिक दबाव और राष्ट्रपति से गुहार
इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूरे कमीशन बोर्ड को बर्खास्त करने की मांग की है। भाजपा का एक तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इस मांग को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और राज्यसभा सदस्य सी. सदानंदन व पीटी. उषा शामिल होंगे। यह कदम निवर्तमान गवर्नर राजेंद्र अर्लेकर द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए पत्र के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने आयोग पर लगे गंभीर आरोपों के चलते मौजूदा बोर्ड को भंग करने की सिफारिश की थी। दूसरी ओर, CPI(M) समर्थक PSC कर्मचारी संघ विरोध प्रदर्शन कर रहा है और आयोग के खिलाफ किसी भी बदले की कार्रवाई का विरोध कर रहा है।
इनपुट: IANS



