गुरूवार, 5 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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तिरुपति लड्डू मामला: सुप्रीम कोर्ट का ट्रायल आंध्र प्रदेश से बाहर ले जाने से इनकार

विश्व प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में कथित मिलावट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई को आंध्र प्रदेश से बाहर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने की…

तिरुपति लड्डू मामला: सुप्रीम कोर्ट का ट्रायल आंध्र प्रदेश से बाहर ले जाने से इनकार
(फोटो: IANS)

विश्व प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में कथित मिलावट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई को आंध्र प्रदेश से बाहर किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने की याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने गुरुवार को यह कहते हुए याचिका ठुकरा दी कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं दिखता, जिसके लिए मुकदमे को ट्रांसफर करना जरूरी हो।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह याचिका माचिंद्र शांताराम लांके और मेसर्स मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण द्वारा मामले पर लगातार दिए जा रहे राजनीतिक बयानों से निष्पक्ष अभियोजन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, पीठ ने कहा कि वह अपने पिछले आदेश में पहले ही सभी को इस पर बयानबाजी से रोक चुकी है।

मामले का पूरा घटनाक्रम और जांच

यह पूरा विवाद सितंबर 2024 में शुरू हुआ था, जब मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान लड्डुओं के लिए खरीदे गए घी में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया गया था। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर 2024 को नायडू को फटकार लगाई थी और कहा था, "हमें उम्मीद है कि भगवान को राजनीति से दूर रखा जाएगा।"

इसके बाद 4 अक्टूबर 2024 को, अदालत ने मामले की जांच सीबीआई निदेशक की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) को सौंप दी थी। सीबीआई के नेतृत्व वाली एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर 23 जनवरी 2026 को नेल्लोर की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अदालत में अंतिम आरोपपत्र दाखिल किया।

प्रयोगशाला की रिपोर्ट में क्या मिला?

आरोपपत्र में करनाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान की एक अहम रिपोर्ट का भी जिक्र है। प्रयोगशाला ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा जुलाई 2024 में लिए गए घी के चार नमूनों का विश्लेषण किया था। रिपोर्ट के अनुसार, नमूनों में सूअर की चर्बी (लार्ड) या किसी अन्य पशु वसा की मौजूदगी नहीं पाई गई। हालांकि, जांच में यह बात सामने आई कि घी में वनस्पति तेलों और प्रयोगशाला में बने एस्टर से मिलावट की गई थी। आरोप है कि यह मिश्रण इस तरह से तैयार किया गया था कि वह डेयरी उत्पादों के रासायनिक मानकों जैसा दिखे।

इस मामले में वित्तीय अनियमितताओं के एंगल से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी है कि यदि भविष्य में मुकदमे की निष्पक्षता को लेकर कोई समस्या आती है, तो वे दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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