नितिन राज केस: केरल हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को लगाई फटकार, पूछा- क्या आरोपी को बचाने की कोशिश थी?
दलित छात्र नितिन राज की आत्महत्या से जुड़े मामले में केरल हाईकोर्ट ने पुलिस के जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने…
दलित छात्र नितिन राज की आत्महत्या से जुड़े मामले में केरल हाईकोर्ट ने पुलिस के जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी में हुई प्रक्रियात्मक चूक को लेकर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने जांच की निगरानी कर रहे पुलिस उपाधीक्षक (DySP) से पूछा कि इतने संवेदनशील मामले में ऐसी बुनियादी गलती कैसे हो सकती है।
यह मामला कन्नूर डेंटल कॉलेज के छात्र नितिन राज की आत्महत्या से जुड़ा है, जिन्होंने कथित तौर पर जाति-आधारित उत्पीड़न के बाद यह कदम उठाया था। इस मामले में कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एम. कोडंडा राम मुख्य आरोपी हैं।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर अदालत के तीखे सवाल
जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने जांच अधिकारी, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस सुधीर कल्लन से जवाब तलब किया। दरअसल, पुलिस ने जब डॉ. राम को पहली बार गिरफ्तार किया, तो उन्हें गिरफ्तारी का आधार बताने में विफल रही, जो कि एक कानूनी अनिवार्यता है। इसी वजह से निचली अदालत ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार दे दिया था। बाद में पुलिस ने प्रक्रिया पूरी कर प्रोफेसर को दोबारा गिरफ्तार किया।
इसी चूक पर जस्टिस बदरुद्दीन ने DySP से पूछा, “पुलिस उपाधीक्षक के रूप में आपने अब तक कितनी गिरफ्तारियां की हैं? दूसरे मामलों में आपने गिरफ्तारी का कारण बताया है। फिर इस मामले में ऐसा क्यों नहीं किया गया?” अदालत ने यह भी पूछा कि क्या यह चूक जानबूझकर की गई थी ताकि आरोपी को फायदा मिल सके।
न्यायपालिका की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, “इतने संवेदनशील मामले में जांच या गिरफ्तारी के दौरान किसी भी तरह की चूक नहीं होनी चाहिए, जिससे आरोपी कानून की पकड़ से बच जाए।” न्यायाधीश ने जांच अधिकारी को उनके कर्तव्य की याद दिलाते हुए कहा, “आप इस तरह की लापरवाही से किसी आरोपी को नहीं बचा सकते। अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाइए। आपका कर्तव्य है कि निष्पक्ष जांच के जरिए पीड़ित और आरोपी, दोनों को न्याय मिले।”
जस्टिस बदरुद्दीन ने यहां तक पूछा, “क्या यह गृह विभाग की छवि खराब करने की कोशिश है, जबकि वह 'ऑपरेशन तूफ़ान' जैसे कई अच्छे काम कर रहा है? क्या आप सरकार से बदला लेना चाहते हैं?” इस पर पुलिस उपाधीक्षक ने जवाब दिया, “ऐसी कोई बात नहीं है, माननीय न्यायालय।”
अदालत नितिन राज के माता-पिता द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने कहा कि वह जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश पहले ही दे चुका है और अब दो हफ्ते बाद मामले की अगली सुनवाई करेगा, जिसमें की गई कार्रवाई के नतीजों का इंतजार होगा।
इनपुट: IANS



