सोमवार, 7 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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तेलंगाना: सिंचाई परियोजनाओं पर सरकार के रुख़ के ख़िलाफ़ KCR करेंगे बड़े आंदोलन का नेतृत्व

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने घोषणा की है कि विधानसभा सत्र के बाद पार्टी अध्यक्ष KCR कालेश्वरम…

तेलंगाना: सिंचाई परियोजनाओं पर सरकार के रुख़ के ख़िलाफ़ KCR करेंगे बड़े आंदोलन का नेतृत्व
(फोटो: IANS)

तेलंगाना में कांग्रेस सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने घोषणा की है कि विधानसभा सत्र के बाद पार्टी अध्यक्ष KCR कालेश्वरम और पालमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं के प्रति सरकार की कथित 'लापरवाही' के ख़िलाफ़ एक बड़े जन-आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। यह फ़ैसला रविवार को एर्रावल्ली स्थित KCR के फार्महाउस पर हुई BRS विधायक दल की बैठक में लिया गया।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बैठक के बाद BRS के उप-नेता टी. हरीश राव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि BRS सरकार ने पालमुरु-रंगारेड्डी परियोजना का 80 प्रतिशत काम पूरा कर दिया था, जिसे पूरा करने पर 60 TMC पानी मिलता, लेकिन मौजूदा सरकार ने बदले की भावना से इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

सिंचाई पर सरकार को घेरने की तैयारी

हरीश राव ने दावा किया कि कालेश्वरम परियोजना में पानी उपलब्ध होने के बावजूद सरकार जानबूझकर पानी नहीं उठा रही है, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “हमने इस बैठक में फैसला किया है कि इन दो परियोजनाओं के प्रति कांग्रेस सरकार के लापरवाह रवैये के विरोध में केसीआर खुद आने वाले दिनों में लाखों लोगों को शामिल करते हुए एक सीधे जन-आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।”

विधानसभा में भी सरकार को घेरने की योजना

BRS ने सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में भी सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई है। हरीश राव ने बताया कि पार्टी किसानों को 'निषिद्ध सूची' में डालकर परेशान करने, बिजली कटौती, ऋण माफी योजना की विफलता, पॉलिटेक्निक जीओ 97 को रद्द करने, सिंगरेनी घोटाले और कर्मचारियों से जुड़े PRC, DA व EHS जैसे मुद्दों को सदन में ज़ोर-शोर से उठाएगी। पार्टी 30 लाख छात्रों की बकाया शुल्क प्रतिपूर्ति (फीस रिइम्बर्समेंट) का मामला भी सदन में उठाएगी। BRS ने सरकार को चुनौती दी है कि वह जनहित के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए एक महीने का विधानसभा सत्र बुलाए।

KCR की अनुपस्थिति पर पलटवार

हरीश राव ने KCR के विधानसभा सत्र में शामिल न होने पर हो रही आलोचना को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जिस तरह की भद्दी और सड़क-छाप भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उसे सुनने के लिए केसीआर को विधानसभा में जाने की कोई जरूरत नहीं है।” उन्होंने अतीत का उदाहरण देते हुए कहा कि जब एनटीआर, जयललिता और चंद्रबाबू जैसे नेताओं का अपमान हुआ था, तो उन्होंने सदन का बहिष्कार किया और मुख्यमंत्री बनकर लौटे। हरीश राव ने दावा किया कि KCR भी उसी रास्ते पर हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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