कर्नाटक: नई ग्रामीण रोजगार योजना 'जी राम जी' को गति देने के निर्देश, मंत्री ने तय की समय सीमा
कर्नाटक में ग्रामीण श्रमिकों को काम मिलने में आ रही दिक्कतों की शिकायतों के बाद, राज्य सरकार ने अपनी नई रोजगार गारंटी योजना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री…
कर्नाटक में ग्रामीण श्रमिकों को काम मिलने में आ रही दिक्कतों की शिकायतों के बाद, राज्य सरकार ने अपनी नई रोजगार गारंटी योजना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने अधिकारियों को 'विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025' (वीबी-जी राम जी) को लागू करने के लिए इसी सप्ताह के अंत तक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया है।
यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें कहा गया था कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम करने वाले मजदूरों को अब नई 'जी राम जी' योजना में पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेने की बात कही, खासकर जब राज्य सूखे की गंभीर स्थिति से जूझ रहा है।
योजना का उद्देश्य और मौजूदा चुनौतियाँ
ईश्वर बी. खंड्रे के मुताबिक, राज्य सरकार ने यह योजना मनरेगा के दायरे से बाहर ग्रामीण श्रमिकों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर देने के लिए शुरू की थी। हालांकि, उन्होंने माना कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी और अधिकारियों तथा लाभार्थियों के बीच जागरूकता के अभाव के कारण कार्यक्रम को अपेक्षित गति नहीं मिल पाई है। मंत्री ने कहा, "ऐसे समय में जब ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब, शोषित, दिव्यांग व्यक्ति, महिलाएं और दलित इस संकट के दौर में रोजगार नहीं पा रहे हैं, तो विकसित भारत-जी राम जी योजना का उद्देश्य विफल हो जाएगा।"
अधिकारियों को सख्त निर्देश
मंत्री खंड्रे ने अधिकारियों को योजना को सख्ती से लागू करने के लिए कई ठोस निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रतिदिन कम से कम 5 लाख लोगों के लिए रोजगार और हर महीने न्यूनतम 1.5 करोड़ कार्य-दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा गया है ताकि पात्र श्रमिक योजना के तहत नामांकन करा सकें।
ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग के आयुक्त को जारी निर्देश में मंत्री ने एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तुरंत तैयार करने को कहा है। इस एसओपी में मनरेगा के साथ तालमेल, तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरी, मजदूरी भुगतान, 60:40 श्रम-सामग्री अनुपात बनाए रखने और निगरानी तंत्र जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। यह एसओपी सप्ताह के अंत तक सभी ग्राम पंचायतों, तालुक और जिला स्तर के अधिकारियों तक पहुँच जानी चाहिए।
इनपुट: IANS



