इंस्टाग्राम पर सहपाठी को 'सुंदर' कहा, कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्र पर दर्ज FIR रद्द की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक 20 वर्षीय कॉलेज छात्र के लिए बड़ी राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। छात्र पर अपनी एक महिला सहपाठी को इंस्टाग्राम पर निजी संदेश भेजकर उसकी तारीफ करने का आरोप…
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक 20 वर्षीय कॉलेज छात्र के लिए बड़ी राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। छात्र पर अपनी एक महिला सहपाठी को इंस्टाग्राम पर निजी संदेश भेजकर उसकी तारीफ करने का आरोप था, जिसे अदालत ने अपराध नहीं माना। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि निजी बातचीत में आज की पीढ़ी ('जेन जेड') की भाषा का इस्तेमाल करना किसी महिला का पीछा करने (स्टॉकिंग) या उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा अपराध नहीं है।
यह मामला एक ही कॉलेज में पढ़ने वाले दो दोस्तों के बीच इंस्टाग्राम पर हुई बातचीत से जुड़ा है। 20 वर्षीय छात्र ने अपनी 21 वर्षीय सहपाठी को डायरेक्ट मैसेज में 'प्रिटी' (प्यारी) और 'ब्यूटीफुल' (सुंदर) कहा था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह निजी संदेश बाद में छात्रा के पिता को दिखाया गया, जो एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। इसके बाद, छात्र के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए के तहत मामला दर्ज किया गया।
"यह अपराध नहीं है": अदालत की टिप्पणी
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल-न्यायाधीश पीठ ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए आपराधिक कानून लागू नहीं किया जा सकता कि किसी छात्र ने निजी बातचीत में अपनी सहपाठी की तारीफ की हो। पीठ ने यह भी चेतावनी दी कि इस तरह के मुकदमों का युवाओं के भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, "यह चैट सार्वजनिक नहीं है। यह दो लोगों के बीच की बातचीत है। इसमें इस्तेमाल की गई भाषा वैसी ही है जैसी आजकल के छात्र इस्तेमाल करते हैं। इसे अपराध नहीं माना जा सकता।" हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजी तौर पर की गई तारीफ अपने आप में स्टॉकिंग, वॉयरिज्म (किसी को छिपकर देखना) या किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अपराध नहीं बनती।
छात्र को मिली राहत, FIR रद्द
अदालत ने कहा कि इस मामले में आपराधिक कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और इससे याचिकाकर्ता छात्र का भविष्य अनावश्यक रूप से खतरे में पड़ सकता है। इस आधार पर कोर्ट ने FIR को रद्द करने का आदेश दिया। साथ ही, जांच अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे जब्त किए गए सभी सामान, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी शामिल हैं, तुरंत छात्र को लौटा दें।
इनपुट: IANS



