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आर्ट ऑफ लिविंग पर भूमि अतिक्रमण के आरोप: कर्नाटक सरकार ने जांच के लिए बनाई SIT

कर्नाटक सरकार ने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और उससे जुड़ी संस्थाओं पर लगे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया…

आर्ट ऑफ लिविंग पर भूमि अतिक्रमण के आरोप: कर्नाटक सरकार ने जांच के लिए बनाई SIT
(फोटो: IANS)

कर्नाटक सरकार ने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और उससे जुड़ी संस्थाओं पर लगे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। बेंगलुरु के संभागीय आयुक्त की रिपोर्ट और भूमि सर्वेक्षण के बाद यह कदम उठाया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी बेंगलुरु दक्षिण तालुक के काग्गलिपुरा, अगारा और जी.एम. पाल्या गांवों में कथित अतिक्रमण की गहन पड़ताल करेगी।

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सरकार के अनुसार, दशकों के दौरान विभिन्न लीज, समझौतों और अन्य लेन-देन के जरिए 290 एकड़ से अधिक सरकारी और सार्वजनिक भूमि संगठन के नियंत्रण में आ गई। जांच के दायरे में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के अलावा वेद विज्ञान महा विद्यापीठ, आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर और सुमेरु समूह की दो निजी कंपनियां भी शामिल हैं।

जांच के प्रमुख बिंदु

एसआईटी को कई पहलुओं की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें यह पता लगाना शामिल है कि क्या लीज समझौतों की आड़ में सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया, शर्तों के साथ आवंटित भूमि को बेचा गया, या सार्वजनिक उपयोग जैसे सड़क, जलाशय और नालों की जमीन पर अतिक्रमण हुआ। सरकारी आदेश में कहा गया है कि आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर समेत कई पदाधिकारियों के खिलाफ पहले से ही एक एफआईआर दर्ज है, जो काग्गलिपुरा गांव में कथित अतिक्रमण से संबंधित है।

विवादित भूमि का ब्योरा

प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि संगठन और उसकी सहयोगी संस्थाओं के पास वर्तमान में करीब 291 एकड़ 38 गुंटा जमीन है, जिसमें लगभग 60 एकड़ सरकारी लीज वाली भूमि भी शामिल है। सरकार का आरोप है कि कई लीज शर्तों और भूमि कानूनों का उल्लंघन हुआ है। उदाहरण के लिए, काग्गलिपुरा में 41 एकड़ जमीन 1985 में 40 साल के लिए मात्र 500 रुपये प्रति एकड़ के वार्षिक किराए पर दी गई थी। सरकार का दावा है कि 2015 में लीज खत्म होने के बाद भी संस्था इसका उपयोग कर रही है। इसी तरह, जी.एम. पाल्या में 19 एकड़ भूमि 2003 में 30 साल के लिए लीज पर दी गई थी, जिसकी अवधि अभी सात साल बाकी है।

एसआईटी का कार्यकाल और निर्देश

यह एसआईटी कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 और कर्नाटक भूमि हड़प निषेध अधिनियम, 2011 के तहत गठित की गई है। सरकार ने जांच दल को तीन महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। एसआईटी भूमि रिकॉर्ड, लीज दस्तावेजों की जांच करेगी और जरूरत पड़ने पर सैटेलाइट इमेजरी की मदद से नया सर्वेक्षण भी कराएगी। सरकार ने सितंबर 2025 में कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उन निर्देशों का भी हवाला दिया है, जिनमें अतिक्रमणकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने और विवादित भूमि का सर्वे कराने को कहा गया था।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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