सूखे से जूझ रहे कर्नाटक ने केंद्र से मांगी ₹22,400 करोड़ की मदद, उपमुख्यमंत्री ने पीएम मोदी से मांगा समय
कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से ₹22,400.58 करोड़ की वित्तीय सहायता की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने इस संबंध में…
कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से ₹22,400.58 करोड़ की वित्तीय सहायता की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया है। उन्होंने इन नेताओं से मुलाकात के लिए समय भी मांगा है ताकि वे व्यक्तिगत रूप से राज्य के हालात से उन्हें अवगत करा सकें।
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए परमेश्वर ने कहा कि किसानों के भविष्य की रक्षा करना केंद्र और राज्य की साझा जिम्मेदारी है, जो राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है। उन्होंने बताया कि राज्य के किसानों को केवल मामूली राहत नहीं, बल्कि अपनी आजीविका दोबारा खड़ी करने के लिए समय पर पर्याप्त सहायता की आवश्यकता है।
बढ़ी हुई सहायता राशि की मांग
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पहले राज्य की कुल सूखा राहत मांग ₹20,585.73 करोड़ थी। लेकिन, केंद्र द्वारा राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के मानदंडों में संशोधन के बाद यह जरूरत बढ़कर ₹22,400.58 करोड़ हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को एक अधिसूचना के जरिए 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए मुआवजे के नियम बदले थे।
इन नए नियमों के तहत, फसल नुकसान के लिए इनपुट सब्सिडी की जरूरत ₹6,128.70 करोड़ से बढ़कर ₹7,943.55 करोड़ हो गई है, जिससे कुल मांग में ₹1,814.85 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि हुई है।
मुआवजे के मौजूदा मानदंड अपर्याप्त
जी. परमेश्वर ने मुआवजे के मानदंडों में संशोधन का स्वागत तो किया, लेकिन इसे किसानों की वास्तविक लागत और नुकसान के मुकाबले अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा कि संशोधित मानदंडों के तहत वर्षा आधारित फसलों के लिए ₹11,000, सिंचित फसलों के लिए ₹22,000 और बारहमासी फसलों के लिए ₹30,000 प्रति हेक्टेयर का मुआवजा तय किया गया है। हालांकि, बीज, उर्वरक, कृषि मजदूरी और सिंचाई की बढ़ती लागतों की तुलना में यह राशि बहुत कम है।
किसानों के डेटाबेस पर भी उठाए सवाल
उपमुख्यमंत्री ने राहत के लिए 2015-16 की कृषि जनगणना के आंकड़ों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लगभग एक दशक पुराने ये आंकड़े किसानों की मौजूदा भूमि जोत और कृषि परिस्थितियों को सही ढंग से नहीं दर्शाते, जिससे कई पात्र छोटे और सीमांत किसान सहायता से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र को किसानों की पहचान के लिए कर्नाटक के 'फ्रूट्स डेटाबेस' जैसे अद्यतन रिकॉर्ड को स्वीकार करना चाहिए।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में सूखे से 226 तालुक प्रभावित हैं और लगभग 57.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे अनुमानित ₹62,481.88 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर एक मानसून की विफलता किसानों की वर्षों की मेहनत बर्बाद कर सकती है, तो 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता।
इनपुट: IANS



