केरल: SFI नेता की DSP पद पर भर्ती में धांधली का आरोप, गृह मंत्री ने SIT जांच के आदेश दिए
केरल में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर एक विशेष भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के एक नेता की नियुक्ति पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगने के बाद राज्य…
केरल में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर एक विशेष भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के एक नेता की नियुक्ति पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगने के बाद राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (SIT) को निर्देश दिए हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई 'सेव यूनिवर्सिटी फोरम' के अध्यक्ष आरएस शशिकुमार की शिकायत पर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) ने SFI नेता के.जे. जिथिन को डीएसपी बनाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर यह भर्ती प्रक्रिया चलाई। गृह मंत्री ने क्राइम ब्रांच की एसआईटी प्रमुख अजिता बेगम को इन आरोपों की विस्तृत जांच करने को कहा है।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
शिकायतकर्ता ने पूरी चयन प्रक्रिया की गति पर सवाल उठाए हैं, जिसे असामान्य रूप से जल्दबाजी में पूरा किया गया। इस पद के लिए 17,392 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिसकी अंतिम तिथि 10 सितंबर 2025 थी। इसके बाद 31 दिसंबर को लिखित परीक्षा, 16 मार्च 2026 को शारीरिक दक्षता परीक्षा और 22 अप्रैल को साक्षात्कार आयोजित किए गए। अंतिम रैंक सूची 6 मई को प्रकाशित कर दी गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह सब पिछली LDF सरकार का कार्यकाल खत्म होने से ठीक पहले जिथिन की नियुक्ति सुनिश्चित करने के मकसद से किया गया। यह पूरी प्रक्रिया KPSC के अध्यक्ष एम.आर. बैजू के नेतृत्व में आगे बढ़ी।
उम्मीदवार की योग्यता और पृष्ठभूमि
आर.एस. शशिकुमार ने अपनी शिकायत में जिथिन की योग्यता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिथिन ने बी.कॉम की परीक्षा ग्रेस मार्क्स के साथ पास की थी और पुलिस कांस्टेबल भर्ती की मुख्य सूची में भी उनका नाम नहीं था। शिकायत में यह भी आरोप है कि जिथिन के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे में उनकी डीएसपी पद पर सीधी नियुक्ति भर्ती नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
हालांकि, के.जे. जिथिन ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चयन प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं हुई और यह शिकायत केवल उनकी नियुक्ति को रोकने के लिए की गई है। यह मामला सोमवार को सामने आया, जिसके बाद KPSC पर भर्तियों में धांधली को लेकर दबाव और बढ़ गया है। इससे पहले भी एक अन्य भर्ती विवाद में क्राइम ब्रांच की एसआईटी KPSC अध्यक्ष और तीन सदस्यों से पूछताछ कर चुकी है।
इनपुट: IANS



