कावेरी जल विवाद: कर्नाटक ने तमिलनाडु के लिए पानी की मात्रा 57% घटाई, डेल्टा क्षेत्र में चिंता बढ़ी
कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक नया मोड़ आया है। कर्नाटक ने अपने जलाशयों से तमिलनाडु के लिए छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में एक ही दिन में 57 प्रतिशत की भारी…
कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद में एक नया मोड़ आया है। कर्नाटक ने अपने जलाशयों से तमिलनाडु के लिए छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में एक ही दिन में 57 प्रतिशत की भारी कटौती कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की कमी और बांधों में पानी की आवक घटने के कारण यह कदम उठाया गया है।
पहले जहाँ तमिलनाडु के लिए कुल 11,983 क्यूबिक फीट प्रति सेकंड (क्यूसेक) पानी छोड़ा जा रहा था, वहीं अब इसे घटाकर मात्र 5,200 क्यूसेक कर दिया गया है। यह 6,783 क्यूसेक की सीधी कमी है, जिसने तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ये किसान अपनी खड़ी फसलों और मौसमी खेती के लिए इसी पानी पर निर्भर रहते हैं, जो मेट्टूर बांध में जमा होता है।
जलाशयों में पानी की स्थिति
कर्नाटक के दो प्रमुख बांधों, कृष्णराज सागर (KRS) और काबिनी से यह पानी छोड़ा जाता है। सोमवार सुबह तक के आँकड़ों के मुताबिक, KRS जलाशय से 4,800 क्यूसेक और काबिनी जलाशय से 1,200 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। दोनों ही जलाशयों में पानी की आवक (इनफ्लो) से ज़्यादा निकासी (आउटफ्लो) हो रही है, जिससे उनके जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
मांड्या जिले में स्थित KRS बांध में पानी का स्तर उसकी कुल क्षमता 124.80 फीट के मुकाबले 106.84 फीट पर था। इसी तरह, मैसूरु जिले के काबिनी जलाशय का जल स्तर भी उसकी कुल क्षमता 2,284 फीट के मुकाबले 2,268.50 फीट दर्ज किया गया।
क्यों आई यह नौबत?
इस कटौती का मुख्य कारण मानसून का कमजोर पड़ना है। KRS के जलग्रहण क्षेत्र, जिसमें कोडगु जिला और केरल का वायनाड शामिल है, में बारिश लगभग पूरी तरह रुक गई है। जब तक इन ऊपरी इलाकों में फिर से बारिश नहीं होती, तब तक जलाशयों में पानी का बहाव बढ़ने की उम्मीद कम है। अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और भविष्य में कोई भी फैसला मौजूदा जल भंडारण और बारिश की स्थिति को देखकर ही लिया जाएगा।
इनपुट: IANS



