कर्नाटक: कैबिनेट में विभागों के बंटवारे पर खींचतान, सीएम शिवकुमार सुलह के लिए दिल्ली रवाना
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के सामने कैबिनेट में विभागों के बंटवारे को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई वरिष्ठ विधायकों की नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए…
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के सामने कैबिनेट में विभागों के बंटवारे को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई वरिष्ठ विधायकों की नाराजगी के बीच मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए शनिवार को दिल्ली में पार्टी आलाकमान से मुलाकात करेंगे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 13 अगस्त से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सरकार पार्टी के भीतर एकजुटता कायम करने की कोशिश में जुटी है।
दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले, सीएम शिवकुमार ने शुक्रवार देर रात पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से उनके बेंगलुरु स्थित आवास पर एक बंद कमरे में बैठक की। सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात का मकसद नाराज चल रहे वरिष्ठ नेताओं को मनाना था, ताकि विधानसभा में विपक्ष का सामना मजबूती से किया जा सके। मुख्यमंत्री को उम्मीद है कि आलाकमान के हस्तक्षेप से सारे मतभेद दूर हो जाएंगे।
वरिष्ठ नेताओं में असंतोष
कैबिनेट में विभागों के आवंटन को लेकर कई विधायक नाखुश हैं, खासकर विभिन्न सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लिंगायत समुदाय को सात कैबिनेट पद मिलने से पार्टी के अंदर संतुलन पर बहस छिड़ गई है। वहीं, सोशल वेलफेयर, लेबर, हायर एजुकेशन और एक्साइज जैसे महत्वपूर्ण विभागों के लिए कई दावेदार हैं।
सात बार के विधायक टी.बी. जयचंद्र की नाराजगी ने मुख्यमंत्री पर दबाव और बढ़ा दिया था। सिद्दारमैया से मिलने के बाद सीएम शिवकुमार सीधे जयचंद्र के घर पहुंचे। जयचंद्र ने विभागों के बंटवारे के तरीके पर आपत्ति जताते हुए विधानसभा में सत्ताधारी पार्टी से अलग बैठने तक की धमकी दे दी थी। मुलाकात के बाद शिवकुमार ने कहा, "जयचंद्र प्रोटेम स्पीकर हैं और मुख्यमंत्री होने के नाते मैं उनके दफ्तर या घर जा सकता हूं।" उन्होंने इसे दोस्ती का रिश्ता बताते हुए भविष्य की रणनीति पर मार्गदर्शन मांगने की बात कही।
मान-मनौव्वल के बाद सुलझा मामला
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद टी.बी. जयचंद्र ने कहा कि मामला अब सुलझ गया है। उन्होंने कहा, "मैं दफ्तर जाऊंगा और काम शुरू करूंगा। यह संवैधानिक जिम्मेदारी है। अगर मैं अपना कर्तव्य नहीं निभाऊंगा तो मुझे कायर कहा जाएगा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने क्षेत्रीय लोगों के दबाव में अपनी बात रखी थी, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं किया था।
एक अन्य वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एच.सी. महादेवप्पा भी अपने पोर्टफोलियो से असंतुष्ट हैं। सिद्दारमैया के करीबी माने जाने वाले महादेवप्पा ने दिल्ली जाकर कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, सुरजेवाला ने उन्हें आश्वासन दिया है कि पार्टी उनके साथ खड़ी है।
इनपुट: IANS



