बुधवार, 23 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक कैबिनेट में खाली पद पर घमासान, सीएम शिवकुमार चर्चा के लिए राहुल गांधी से मिलेंगे

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की कैबिनेट में एक खाली पद को लेकर पार्टी के भीतर लॉबिंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां उनकी कांग्रेस नेता…

कर्नाटक कैबिनेट में खाली पद पर घमासान, सीएम शिवकुमार चर्चा के लिए राहुल गांधी से मिलेंगे
(फोटो: IANS)

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की कैबिनेट में एक खाली पद को लेकर पार्टी के भीतर लॉबिंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात होने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में खाली मंत्री पद को भरने के साथ-साथ मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग पर भी बातचीत हो सकती है।

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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जाति, क्षेत्र, समुदाय और लिंग के आधार पर प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने गुरुवार को दिल्ली में राहुल गांधी से दोपहर में मिलने का समय मांगा है। माना जा रहा है कि इस अहम चर्चा में एआईसीसी महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल और कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला भी शामिल होंगे।

कौन हैं मंत्री पद के दावेदार?

खाली पद के लिए कई नामों पर विचार किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया वरिष्ठ विधायक बसवराज शिवन्नवर का समर्थन कर रहे हैं ताकि प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाया जा सके। बेंगलुरु से चार बार के विधायक एम. कृष्णप्पा का नाम भी चर्चा में है। इसके अलावा, सरकार पर किसी महिला नेता को कैबिनेट में शामिल करने का भी दबाव है, जिसके चलते विधायक अन्नपूर्णा तुकाराम और विधायक काम्पली गणेश के नामों पर भी गौर किया जा रहा है।

मंत्री नागेंद्र पर इस्तीफे का दबाव

कैबिनेट विस्तार की यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब योजना एवं आदिवासी कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र पर कथित अनियमितताओं के आरोपों के चलते इस्तीफे का दबाव है। भाजपा और जेडी(एस) लगातार उनके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर नागेंद्र इस्तीफा देते हैं, तो अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय को प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा और भी अहम हो जाएगा। हालांकि, नागेंद्र का कहना है कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन उन्होंने पार्टी आलाकमान के निर्देश पर पद छोड़ने की इच्छा भी जताई है।

प्रतिनिधित्व पर असंतोष

सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में प्रतिनिधित्व को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी नाखुश हैं। उनका मानना है कि वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों को जरूरत से ज्यादा, जबकि अल्पसंख्यकों को अपर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है। इससे पहले, पार्टी ने वरिष्ठ नेता और एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा का नाम मंत्रियों की सूची में घोषित किया था, लेकिन बाद में उन्हें शपथ ग्रहण के लिए नहीं बुलाया गया, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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