कर्नाटक: स्कूल शौचालय में मिलीं आयरन की 50,000 गोलियां, भाजपा ने की FIR की मांग
कर्नाटक के रायचूर जिले में एक सरकारी स्कूल के शौचालय में 50,000 से अधिक आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां फेंकी हुई मिलने के बाद राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विधानसभा में…
कर्नाटक के रायचूर जिले में एक सरकारी स्कूल के शौचालय में 50,000 से अधिक आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां फेंकी हुई मिलने के बाद राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने बुधवार को इस घटना को लेकर सिद्धारमैया सरकार पर तीखा हमला बोला है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, आर. अशोक ने इस घटना को "प्रशासनिक विफलता का चौंकाने वाला उदाहरण" करार देते हुए सरकार पर गरीब बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। यह मामला रायचूर जिले के लिंगसुगुर तालुक के गुरुगुंटा सरकारी स्कूल का है, जहाँ छात्रों के लिए बनीं दवाइयां बर्बाद पाई गईं।
सरकार पर लगे गंभीर आरोप
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह एक बेरहम सरकार है जो बच्चों के पेट पर लात मार रही है और उनकी जान से खिलवाड़ कर रही है।" उन्होंने हाल की एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले मवेशियों के बाड़े में पौष्टिक मिल्क पाउडर मिला था और अब स्कूल के शौचालय में बच्चों की दवाइयां मिली हैं।
उन्होंने आगे कहा, "दिहाड़ी मजदूरों के बच्चों में कुपोषण से लड़ने के लिए बनी दवाइयां सरकार के भ्रष्ट और गैर-ज़िम्मेदार प्रशासन की वजह से टॉयलेट में सड़ रही हैं।"
सीधे मुख्यमंत्री से पूछे सवाल
आर. अशोक ने सीधे मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा, "क्या आपकी सरकार के कथित कमीशन और लूट के जुनून के कारण गरीब बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ना चाहिए? क्या आपके स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग सो रहे हैं या वे इस भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए पहरा दे रहे हैं?"
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इन गोलियों को फेंकने के लिए कौन जिम्मेदार था और अधिकारियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोषियों को केवल नोटिस जारी कर बचाया जा रहा है।
दोषियों पर आपराधिक मामले की मांग
भाजपा ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आर. अशोक ने कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए और सिर्फ विभागीय जांच करने के बजाय दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।
मिड-डे मील और अन्य योजनाओं पर भी उठाए सवाल
इसके अलावा, अशोक ने सरकार पर आंगनवाड़ी केंद्रों को अंडे और पोषण सप्लीमेंट के लिए फंड जारी करने में देरी करने और मिड-डे मील योजना में बाधा डालने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाजिरी के लिए "निरंतर" ऐप के अनिवार्य उपयोग से, खासकर खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले कारवार और मलनाड जैसे इलाकों में, बच्चों को मिड-डे मील मिलने में समस्या आ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से नेटवर्क की समस्या हल होने तक फिजिकल हाजिरी रजिस्टर को आधार मानने का आग्रह किया है।
इनपुट: IANS



