पाकिस्तान: सरकारी अस्पतालों की लापरवाही से बच्चों में HIV संक्रमण, कराची में अभिभावकों का प्रदर्शन
पाकिस्तान में बच्चों के बीच तेजी से फैलते एचआईवी संक्रमण को लेकर सैकड़ों परिवारों ने कराची में प्रदर्शन कर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है। अभिभावकों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों और क्लीनिकों में…
पाकिस्तान में बच्चों के बीच तेजी से फैलते एचआईवी संक्रमण को लेकर सैकड़ों परिवारों ने कराची में प्रदर्शन कर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है। अभिभावकों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों और क्लीनिकों में असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं के कारण उनके बच्चे इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, और उन्होंने इसके लिए स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं को 'रोकी जा सकने वाली और मानवजनित स्वास्थ्य त्रासदी' बताते हुए प्रदर्शनकारी परिवारों ने न्याय की गुहार लगाई है। बताया जा रहा है कि इस्तेमाल की गई सिरिंजों का दोबारा उपयोग, दूषित दवा की शीशियाँ और असुरक्षित तरीके से खून चढ़ाना संक्रमण फैलने के मुख्य कारण हैं। पाकिस्तान ऑब्जर्वर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वजह से अब तक लगभग नौ बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य संक्रमित हुए हैं।
चिंताजनक आंकड़े और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूएनएड्स जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी पाकिस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पिछले दो दशकों में पाकिस्तान में एचआईवी संक्रमण के मामलों में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान एशिया में सबसे तेजी से एचआईवी संक्रमण फैलाने वाले देशों में से एक है। इसके अलावा, देश में हेपेटाइटिस-सी के मामले भी दुनिया में सबसे अधिक हैं, जिससे करीब एक करोड़ लोग प्रभावित हैं।
एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि संक्रमित बच्चों में से 90 प्रतिशत से अधिक की माताएं एचआईवी-नेगेटिव पाई गई हैं, जो सीधे तौर पर असुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं की ओर इशारा करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की मांग की है।
न्यायिक हस्तक्षेप और सरकारी पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंध हाईकोर्ट ने इसका स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने सिंध के स्वास्थ्य सचिव और प्रांतीय पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी कर संक्रमण फैलने और इसमें चिकित्सकीय लापरवाही की भूमिका पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल के अनुसार, देश में 84,000 एचआईवी मामले पंजीकृत हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है।
यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। तौंसा, कोट मोमिन, मीरपुरखास, कराची और हैदराबाद जैसे कई इलाकों में सामने आए मामले संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र का कम बजट, जो लगातार जीडीपी के एक प्रतिशत से भी कम रहा है, इस संकट की एक बड़ी वजह है।
इनपुट: IANS



