मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कल्लाकुरिची शराब कांड: जांच आयोग की रिपोर्ट मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में रखी जाएगी

तमिलनाडु की सबसे घातक त्रासदियों में से एक, कल्लाकुरिची जहरीली शराब कांड की जांच करने वाले एक-सदस्यीय आयोग की अंतिम रिपोर्ट मंगलवार को राज्य विधानसभा में पेश की जाएगी। इस घटना में मेथनॉल युक्त अवैध…

कल्लाकुरिची शराब कांड: जांच आयोग की रिपोर्ट मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में रखी जाएगी
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु की सबसे घातक त्रासदियों में से एक, कल्लाकुरिची जहरीली शराब कांड की जांच करने वाले एक-सदस्यीय आयोग की अंतिम रिपोर्ट मंगलवार को राज्य विधानसभा में पेश की जाएगी। इस घटना में मेथनॉल युक्त अवैध शराब पीने से 67 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 145 लोग इलाज के बाद ठीक हुए थे।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह रिपोर्ट मद्रास हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. गोकुलदास की अध्यक्षता वाले आयोग ने तैयार की है। 19 और 20 जून, 2024 को हुई मौतों के बाद तत्कालीन डीएमके सरकार ने इस आयोग का गठन किया था। रिपोर्ट में उन परिस्थितियों का विस्तृत ब्योरा होने की उम्मीद है, जिनके कारण यह त्रासदी हुई।

जांच का दायरा और प्रमुख बिंदु

आयोग को कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच का काम सौंपा गया था। इसमें औद्योगिक मेथनॉल की आपूर्ति श्रृंखला की पड़ताल करना शामिल था कि यह कैसे अवैध शराब बनाने वालों तक पहुंचा। साथ ही, प्रवर्तन एजेंसियों, जैसे कि पुलिस, राजस्व और उत्पाद शुल्क विभाग की संभावित चूकों का पता लगाने के लिए भी कहा गया था। उम्मीद है कि रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सिफारिशें भी होंगी, जिनमें निगरानी बढ़ाने और मेथनॉल की आवाजाही को नियंत्रित करने जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।

त्रासदी और सरकारी प्रतिक्रिया

यह दुखद घटना कल्लाकुरिची के करुणापुरम और आसपास के इलाकों में घटी थी। पीड़ितों में से अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के दिहाड़ी मजदूर थे, जिन्होंने मेथनॉल मिली अवैध शराब का सेवन किया था। उल्टी, पेट दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखने के बाद उन्हें कल्लाकुरिची, सलेम, विल्लुपुरम और पुडुचेरी के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। इस मानवीय संकट के बाद, सरकार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने और अनाथ हुए बच्चों की मदद करने की घोषणा की थी।

अब तक की कार्रवाई

मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की, जिसे बाद में अपराध शाखा-सीआईडी (CB-CID) को सौंप दिया गया। कार्रवाई के दौरान लगभग 200 लीटर मेथनॉल मिश्रित शराब जब्त की गई और मेथनॉल आपूर्तिकर्ता समेत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई, जिसमें जिला कलेक्टर का तबादला और पुलिस व आबकारी विभाग के कई कर्मियों के खिलाफ कदम उठाए गए। बाद में, नवंबर 2024 में मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया था।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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